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________________ आगम (४०) भाग-4 “आवश्यक'- मूलसूत्र अध्ययनं , मूलं - गाथा-], नियुक्ति : [८४१-८४७/८४१-८४७], भाष्यं [१५०...] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता: आगमसूत्र-[४०]मूलसूत्र [१] आवश्यकनियुक्ति: एवं जिनभद्रगणिरचिता चूर्णि-2 प्रत चूर्णी सूत्रांक 18| सक्के हरिणेगमसि सद्दावेति, सद्दावेत्ता एवं व०- खिप्पामेव भी सभाए सुहम्माए जोयणपरिमंडलं जथा उसभसामिस्स आभ-18 सेगे जाव सामितेण उवागतो । ताहे एरावणविलग्गे चेव तिक्खुत्तो आदाहिणपदाहिणं करेति, ताहे सो हत्थी अग्गपादेहिं भूमीए दशाणभद्र ठितो, ताहे तस्स हथिस्स दसण्णकूडे पब्बते पदाणि देवतप्पभावण उद्विताणि, ताहे से णामं जातं गयत्थपतउचि। उपोद्घात है नियुक्ती तते णं से दसण्णभदे राया पुच्वं निग्मते पासति सकस्स देविंदस्स दिब्वं देबिड्डि जाब एगमेगेसु गड्ढविधि, सक्कं च देविंदं | है एरावणहस्थिवरगतं सिरीए अतीव अतीव उवसोभेमाण पासति २ विम्हिते समाणे अणिमिसाए दिट्ठीए देहमाणे चिट्ठति, ततेणं ॥४८४|| तस्स रण्णो राइड्डी सकस्स देवरण्णो दिव्वेणं पभावेणं हतप्पभा जाव लुप्पप्पभा जाता यावि होत्था, तते णं सके देविंदे दसण्णभदरायं एवं बयासी-हं भो दसण्णभदराया ! किष्णं तुम न याणसि जथा-देविंदअसुरिंदनागिंदवंदिता अरहता भगवंतो, तथावि णं तव इमे अज्झथिए-गच्छामिण भैते भगवं महावीरं बंदए जथा ण अण्णण केणइ, गच्छतित्ति, ततेण से राया लज्जिते विलिए बेड़े तुसिणीए संचिट्ठति, चितेति य-कतो एरिसी अम्हारिसाण इडित्ति , अहो कएल्लो गेण धम्मो, अहमवि करेमि, भणति-( पदण्णा) पालणं च कत होहितित्ति सव्वं पयहिऊण पब्वइतो । एवं सामाइयं इड्डीए लम्भतित्ति । सकारण, एको धिज्जाइओ तथारूवाण थेराणं अंतिके सोच्चा पब्बइओ समहिलो उग्गं उग्गं पम्बज करेति, नवरमवरोप्पर पीतिते ओसरति, महिला मणागं धिज्जाइणिचि गव्बमुवहति, मरिऊण देवलोग गवाणि, जहाउग भुतं, इतो य इलावद्धनगर, SIncarn तस्थ इला देवता, ते एगा सत्यवाही पुत्तमलभमाणी उदाणति, सो चइऊण पुत्तो से जातो, इलापुत्तो नाम कर्त, कलाओ अधि-है। ज्जितो, इतरावि लखगकुले जाता, दोवि जोव्वर्ण पत्ताणि, अण्णदा सो तीए रूवे अझोवषण्णे, सां मग्गिज्जतीवि ण लब्भति, ता REASE दीप अनुक्रम सरल्या (193)
SR No.035054
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 05 Aavashyak 2 Niryukti Evam Churni Aagam 40
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages328
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size26 MB
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