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________________ आगम (४५) [भाग-३९] "अनुयोगद्वार"-चूलिकासूत्र-२ (मूलं+वृत्ति:) ........... मूलं [४४] / गाथा ||४...|| ......... पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित...आगमसूत्र-[४५), चूलिकासूत्र-२] अनुयोगद्वार मूलं एवं हेमचन्द्रसूरि-रचिता वृत्ति: प्रत सूत्रांक [४४] दीप अनुक्रम [५०] से किं तं खंधे ?, २ चउविहे पण्णत्ते, तंजहा-नामखंधे ठवणाखंधे दव्वखंधे भाव खंधे ( सू०४४) अथ किं तत् स्कन्ध इत्युच्यते इति प्रश्ने निर्वचनमाह-खंधे चउब्बिहे' इत्यादि । ४४ ॥ नामट्रवणाओ पुश्वभणिआणुक्कमेण भाणिअव्वाओ (सू०४५) अत्र नामस्कन्धस्थापनास्कन्धप्रतिपादकसूत्रं नामस्थापनावश्यकप्रतिपादकसूत्रव्याख्यानुसारेण खयमेव भावनीयम् ॥ ४५ ॥ से किं तं दव्वखंधे ?, २ दुविहे पण्णते, तंजहा आगमतो अ नोआगमतो अ, से किं तं आगमओ दव्वखंधे ?, २ जस्स णं खंधेत्ति पयं सिक्खियं सेसं जहा दव्वावस्सए तहा भाणिअव्वं, नवरं खंधाभिलावो जाव से किं तं जाणयसरीरभविअसरी रखइरित्ते दव्वखंधे ?, २तिविहे पपणत्ते, तंजहा-सच्चित्ते अचित्ते मीसए (सू०४६) द्रव्यस्कन्धसूत्रमपि भव्यशरीरद्रब्यस्कन्धसूत्रं यावद् द्रव्यावश्यकोक्तव्याख्यानुसारेणैव भावनीय, प्राय१ गयाओ प्र. अथ 'स्कन्धस्य नाम-आदि चत्वार: निक्षेपा: प्ररुप्यते ~88~
SR No.035039
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 39 Anuyogdwar Mool evam Vrutti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages560
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_anuyogdwar
File Size129 MB
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