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________________ आगम (४५) प्रत सूत्रांक [१५१] दीप अनुक्रम [३१८] [भाग-३९] “अनुयोगद्वार " - चूलिकासूत्र - २ ( मूलं+वृत्तिः) मूलं [ १५१] / गाथा || १२२... || एतदवसाने च निःशेषितं प्रमाणद्वारमित्युपसंहरति- 'से तं पमाणे 'ति । प्रमाणद्वारं समासम् ॥ १५० ॥ अथ क्रमप्राप्सं वक्तव्यताद्वारं निरूपयितुमाह अथ 'वक्तव्यता' व्याख्यायते से किं तं वत्तव्वया ?, २ तिविहा पण्णत्ता, तंजहा ससमयवत्तव्वया परसमयवत्तव्वया ससमयपर समयवत्तव्वया । से किं तं ससमयवत्तव्वया १, २ जत्थ णं ससमए आघविजइ पण्णविज्जइ परूविजइ दंसिज्जइ निदंसिजइ उवदंसिजइ, से तं ससमयवतव्वया । से किं तं परसमयवत्तव्वया १, २ जत्थ णं परसमए आघविजइ जाव उवदंसिजइ, से तं परसमयवत्तव्वया से किं तं ससमयपरसमयवतव्वया ?, २ जत्थ णं ससमए परसमए आघविजइ जाव उवदंसिजइ, से तं ससमयपरसमयवन्तव्वया । इआणीं को णओ कं वत्तव्वयं इच्छइ ?; तत्थ णेगमसंगहववहारा तिविहं वत्तव्वयं इच्छंति, तंजहा- ससमयवत्तव्वयं परसमयवत्तव्वयं ससमयप रसमयवत्तव्वयं, उज्जुसुओ दुविहं वत्तव्वयं इच्छइ, तंजहा ससमयवत्तव्वयं परस For e&Personal Use City पूज्य आगमोद्धारकश्री संशोधितः मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित ... आगमसूत्र - [४५], चूलिकासूत्र [२] अनुयोगद्वार मूलं एवं हेमचन्द्रसूरि - रचिता वृत्तिः ~ 496~
SR No.035039
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 39 Anuyogdwar Mool evam Vrutti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages560
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_anuyogdwar
File Size129 MB
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