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________________ आगम (४५) [भाग-३९] "अनुयोगद्वार”- चूलिकासूत्र-२ (मूलं+वृत्ति:) ............ मूलं [१२४] / गाथा ||१८-२३|| ........ पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित...आगमसूत्र-[४५), चूलिकासूत्र-२] अनुयोगद्वार मूलं एवं हेमचन्द्रसूरि-रचिता वृत्ति: प्रत सूत्रांक [१२४] अनुयो मलधारीया वृत्तिः उपक्र माधि ॥१०९॥ दीप अनुक्रम [१५१-१५८] से किं तं तिनामे ?, २ तिविहे पपणत्ते, तंजहा-दवणामे गुणणामे पज्जवणामे असे किं तं दवणामे ?, २ छव्विहे पण्णत्ते, तंजहा-धम्मत्थिकाए अधम्मत्थिकाए आगासत्थिकाए जीवस्थिकाए पुग्गलत्थिकाए अद्धासमए अ, से तं दध्वनामे। किं तं गुणणामे ?, २ पंचविहे पण्णत्ते, तंजहा-वण्णणामे गंधणामे रसणामे फासणामे संठाणणामे । से किं तं वण्णणामे ?, २ पंचविहे पण्णत्ते, तंजहा-कालवण्णनामे नीलवण्णनामे लोहिअवण्णनामे हालिद्दवण्णनामे सुकिल्लवण्णणामे, से तं वपणनामे। से किं तं गंधनामे ?, २ दुविहे पण्णत्ते, तंजहा-सुरभिगंधनामे अ दुरभिगंधनामे अ, से तं गंधनामे । से किं तं रसनामे ?, २ पंचविहे पण्णत्ते, तंजहा-तित्तरसणामे कडुअरसणामे कसायरसणामे अंबिलरसणामे महुररसणामे अ, से तं रसणामे । से किं तं फासणामे ?, २ अट्टविहे पण्णत्ते, तंजहा-कक्खडफासणामे मउअफा गरुअफा० लहुअफा० सीतफासणामे उसिणफासणामे णिद्धफा० लुक्खफासणामे, से तं फासणामे । से ~229~
SR No.035039
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 39 Anuyogdwar Mool evam Vrutti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages560
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_anuyogdwar
File Size129 MB
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