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________________ आगम (४५) [भाग-३९] "अनुयोगद्वार"-चूलिकासूत्र-२ (मूलं+वृत्ति:) ............. मूलं [१०२] / गाथा ||११|| ........................ पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित...आगमसूत्र-[४५], चूलिकासूत्र-२] अनुयोगद्वार मूलं एवं हेमचन्द्रसूरि-रचिता वृत्ति: प्रत सूत्रांक भनुवो. [१०२]] मख्यारीया गाथा ॥८७॥ ||१|| RSSCRACCES वर्दसणया कजइ, से किं तं संगहस्स भंगोवदंसणया ?, २ तिपएसोगाढे आणुपुव्वी एगपएसोगाढे अणाणुपुव्वी दुपएसोगाढे अवतव्वए अहवा तिपएसोगाढे अ एगपएसोगाढे अ आणुपुवी अ अणाणुपुव्वी अ एवं जहा दव्वाणुपुबीए संगहस्स तहा खेत्ताणुपुठवीए वि भाणिअव्वं जाव से तं संगहस्स भंगोवदंसणया । से किं तं समोआरे?, २ संगहस्स आणुपुत्वीदव्वाई कहिं समोअरंति ? किं आणुपुवीदव्वेहि समोअरंति अणाणुपुत्वीदव्वेहि अवत्तव्वगदव्वहिं ?, तिषिणवि सटाणे समोअरंति, से तं समोआरे । से किं तं अणुगमे?, २ अट्रविहे पण्णत्ते, तंजहा-संतपयपरूवणया जाव अप्पाबहुं नत्थि ॥ २॥ संगहस्स आणुपुव्वीदव्वाई किं अस्थि णत्थि ?, नियमा अत्थि, एवं तिष्णिवि, सेसगदाराई जहा दवाणुपुठवीए संगहस्स तहा खेत्ताणुपुबीए वि भाणिअव्वाई, जाव से तं अणुगमे । से तं संगहस्स अणोवणिहिआ खेताणुपुवी। से तं अणोवणिहिआ खेत्ताणुपुवी (सू० १०२) 1994-954:584 दीप अनुक्रम [११७ ॥८७॥ Jatica ~185
SR No.035039
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 39 Anuyogdwar Mool evam Vrutti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages560
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_anuyogdwar
File Size129 MB
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