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________________ आगम (४५) [भाग-३९] “अनुयोगद्वार"-चूलिकासूत्र-२ (मूलं+वृत्तिः ) ............. मूलं [१०२] / गाथा ||११|| ........................ पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित...आगमसूत्र-[४५], चूलिकासूत्र-२] अनुयोगद्वार मूलं एवं हेमचन्द्रसूरि-रचिता वृत्ति: प्रत सूत्रांक [१०२] गाथा ||१|| से किं तं संगहस्स अणोवणिहिआ खेत्ताणुपुब्बी ?, २पंचविहा पण्णत्ता, तंजहाअट्ठपयपरूवणया भंगसमुक्त्तिणया भंगोवदंसणया समोआरे अणुगमे, से किं तं संगहस्स अटुपयपरूवणया?, २ तिपएसोगाढे आणुपुव्वी चउप्पएसोगाढे आणुपुव्वी जाव दसपएसोगाढे आणुपुव्वी संखिजपएसोगाढे आणुपुवी असंखिजपएसोगाढे आणुपुवी एगपएसोगाढे अणाणुपुब्बी दुपएसोगाढे अवत्तव्वए, से तं संगहस्स अट्रपयपरूवणया । एआए णं संगहस्स अट्टपयपरूवणयाए किं पओअणं?, संगहस्स अटुपयपरूवणयाए संगहस्स भंगसमुकित्तणया कज्जइ, से किं तं संगहस्स भंगसमुकित्तणया ?, २ अस्थि आणुपुब्वी अस्थि अणाणुपुव्वी अस्थि अवत्तव्बए, अहवा अस्थि आणुपुवी अ अणाणुपुवी अ एवं जहा दवाणुपुबीए संगहस्स तहा भाणिअव्वं जाव से तं संगहस्स भंगसमुकित्तणया । एआए णं संगहस्स भंगसमुकितणयाए किं पओअणं?, एआए णं संगहस्स भंगसमुक्त्तिणयाए संगहस्स भंगो दीप अनुक्रम [११७ ~184~
SR No.035039
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 39 Anuyogdwar Mool evam Vrutti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages560
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_anuyogdwar
File Size129 MB
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