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________________ आगम (४५) [भाग-३९] "अनुयोगद्वार"-चूलिकासूत्र-२ (मूलं+वृत्ति:) ............ मूलं [१२] / गाथा ||८...|| ........ पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित...आगमसूत्र-[४५), चूलिकासूत्र-२] अनुयोगद्वार मूलं एवं हेमचन्द्रसूरि-रचिता वृत्ति: प्रत सूत्रांक [१२] दीप अनुक्रम [१०४] पूर्वी १ अवक्तव्यक १ इति त्रयः प्रत्येकभङ्गाः, आनुपूर्वी १ अनानुपूर्वी १ इति प्रथमो द्विकयोगः, आनुपूर्वी १ अवक्तव्यक १ इति द्वितीयो बिकयोगः, अनानुपूर्वी अवक्तव्यक इति तृतीयो दिकयोगः, आनुपूर्वी १ अनाहै|नुपूर्वी १ अवक्तव्यक १इति त्रिकयोगः, एवमेते सप्त भङ्गाः। 'सेत'मित्यादि निगमनम् ॥ १२॥ भोपदर्श-IN |नतां विभणिषुराह से किं तं संगहस्स भंगोवदंसणया ?, २ तिपएसिया आणुपुठवी परमाणुपोग्गला अणाणुपुवी दुपएसिया अवत्तव्वए, अहवा तिपएसिया य परमाणुपोग्गला य आणुपुब्बी य अणाणुपुटवी य, अहवा तिपएसिया य दुपएसिया य आणुपुव्वी य अवत्तव्वए य अहवा परमाणुपोग्गला य दुपएसिया य अणाणुपुवी य अवत्तव्वए य अहवा तिपएसिया य परमाणुपोग्गला य दुपएसिया य आणुपुब्बी य अणाणुपुव्वी य अवत्तव्वए य, से तं संगहस्स भंगोवदंसणया (सू०९३) से किं तं संगहस्स समोयारे ?, २ संगहस्स आणुपुव्वीदव्वाई कहिं समोयरंति ?, किं आणुपुत्वीदव्वेहिं समोयरंति ? अणाणुपुवीदव्वेहिं समोयरंति ? अवत्तव्वगदव्वेहि XCHAR 6-18SE ~152
SR No.035039
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 39 Anuyogdwar Mool evam Vrutti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages560
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_anuyogdwar
File Size129 MB
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