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________________ आगम (१३) [भाग-१५] “राजप्रश्नीय” – उपांग सूत्र-२ (मूलं+वृत्तिः ) --------------- मूलं [३९] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र- [१३], उपांगसूत्र- [२] "राजप्रश्नीय" मूलं एवं मलयगिरि-प्रणीता वृत्ति: उपपातादि सभावर्णनम् श्रीराजमश्नी मलयगिराया दृत्तिः ॥१४॥ मू०४० प्रत सूत्रांक [४०] दीप सोहासणं सपरिवार जाव दामा चिट्ठति, तत्थ णं सूरियाभस्स देवस्स बहुअभिसेयभंड संनिखित्ते चिटइ, अट्ठमंगलगा तहेव, तीसे णं अभिसेगसभाए उत्तरपुरच्छिमेणं एरथ णं अलंकारियसभा पष्णता, जहा सभा सुधम्मा मणिपेडिया अट्ट जोयणाई सीहासणं सपरिवारं, तत्थ णं मूरियाभस्त देवस्स सुबहअलंकारियों संनिखिते चिट्टति, सेसं तहेच, तीसे ण अलंकारियसभाए उत्तरपुरच्छिमेणं एत्य णं महेगा यवसायसभा पण्णत्ता,जहा उववायसभा जाय सीहासणं सपरिवार मणिपेदिया अमंगलगा०, तत्थ णं सूरियाभस्स देवस्स एत्थ णं महेगे पोत्थयरयणे सन्निखिसे चिट्टा, तस्स णं पोत्ययरयणस्स इमेयारूवे वण्णावासे पण्णने, तंजहा-रयणामयाइ पत्तगाई रिहामइयो कंबिआओ तवणिजमए दोरे नाणामणिमए गंठी वेरुलियमए लिप्पासणे रिहामए छंदणे तवणिजमई संकला रिद्वामई मसी बहरामई लेहणी रिहामयाई अक्खराई धम्मिए सत्थे, ववसायसभाए णं उपरि अमंगलगा, तीसे गं ववसायसभाए उत्तरपुरछिमेणं एत्थ ण नंदापुक्खरिणी पण्णत्ता हरयसरिसा, तीसे णं णदाए पुक्खरणीए उत्तरपुरच्छिमेणं महेगे बलिपीढे पणले सहरयणामए अच्छेजाव पडिरूवे ॥ (म०४०)॥ तस्य च सिद्धायतनस्य उत्तरपूर्वस्यामत्र महत्येका उपपातसभा प्रज्ञप्ता, तस्याश्च सुधर्मागमेन स्वरूपवर्णनपूर्वादिद्वारयवर्णनमुखमण्डपप्रेक्षागृहमण्डपादिवर्णनादिप्रकाररूपेण तावद्वक्तव्यं यावदुल्लोकवर्णनं, तस्याश्च बहुसमरमणीयभूमिभागस्य अनुक्रम [४०] BAN|९६॥ REaratanimal anditurary.com ~ 201~
SR No.035015
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 15 Rajprashniya Mool evam Vrutti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages314
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_rajprashniya
File Size68 MB
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