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________________ आगम (०३) [भाग-6] "स्थान" - अंगसूत्र-३ (मूलं+वृत्ति:) स्थान [9], उद्देशक [१], मूलं [४०४] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित....आगमसूत्र - [०३], अंग सूत्र - [०३] "स्थान" मूलं एवं अभयदेवसूरि-रचित वृत्ति: श्रीस्थाना वात्त: प्रत ३०२॥ K सूत्रांक [४०४] दीप अनुक्रम [४३८] NE-HEBE%%*35*356057 संगामिया अणियाधिवती पं० सं०-पायत्ताणिते पीढाणिते कुंजराणिते महिसाणिते रहाणीते, दुमे पायत्ताणिताधिवती सोदामी आसराया पीढाणियाधिवती कुंथू हस्थिराया कुंजराणिताधिवती लोहितक्खे महिसाणिताधिवती किन्नरे रचाणिताधिवती । बलिस णं वतिरोतणिदस्स वतिरोतणरनो पंच संगामिताणिवा पंच संगामिताणीयाधिवती पं० सं०पावत्ताणिते जाब रथाणिते, महहुमे पायत्ताणिताधिवती महासोतामो आसराता पीढाणिताधिवती मालंकारो हस्थिराया कुंजराणिताधिपती महालोहिअक्खो महिसाणिताधिवती किंपुरिसे रधाणिताधिपती । धरणस्स णं णागकुमारिदस्स णागकुमाररमो पंच संगामिता अणिता पंच संगामिताणीयाधिपती पं००-पायत्ताणिते आव रहाणीय, भदसेणे पायसाणिताधिपती जसोधरे आसराया पीठाणिताधिपती सुदंसणे हस्थिराया कुंजराणिवाधिपती नीलकंठे महिसाणियाधिपती आणंदे रहाणिताहिबई । भूयाणंदस्स नागकुमारिंदस्स नागकुमाररन्नो पंच संगामियाणिया पंच संगामियाणीयाहिवई पं० २०-पायताणीए जाब रहाणीए दक्खे पायत्ताणियाहिवई सुग्गीवे आसराया पीढाणियाहियई सुविक्कमे हस्थिराया कुंजराणिताहिवई सेयकंठे महिसाणियाहिवई नंदुत्तरे रहाणियाहिवई। वेणुदेवस्स र्ण सुवनिंदस्स मुवनकुमाररनो पंच संगामियाणिता पंच संगामिताणिताहिपती पं० २०-पायत्ताणीते एवं जया धरणस्स तथा वेणुदेवस्सवि, वेणुदालियस्स जहा भूताणंदुस्स, जधा धरणस्स तहा सम्बेसि दाहिणिल्लाणं आव घोसस्स, जधा भूतार्णदस्स तधा सम्वेसिं पुतरिकाणं जाव महाघोसस्स । सकस्स णं देविंदस्स देवरन्नो पंच संगामिता अणिता पंच संगामिताणिताधिवती पं० सं० -पायत्ताणिते जाव उसमाणिते, हरिणेगमेसी पायत्ताणिताधिवती वाऊ आसराता पीढाणिताधिवई एरावणे हत्यिराया ५स्थाना उद्देशः १ ज्योतिष्कभव्यदेवादिपरिचारणाऽग्रमहिषीचमराधनीकानिद्विकल्पाभ्यन्तरपर्षस्थितिः |सू०४०१. ५०५ ॥ २॥ Saintaiatom : ~37~
SR No.035006
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 06 Sthan Mool evam Vrutti Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages494
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_sthanang
File Size106 MB
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