SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 12
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ निमित्त अवस्था में मूर्च्छित अवस्था में तथा निद्रा अवस्था में दयिक भाव अवश्य है । उदीरणाभाव नहीं है परन्तु [ ७ प्रश्न – निमित्त - नैमित्तिक सम्बन्ध किसे कहते हैं ? - उत्तर - जनकजन्य भाव का नाम निमित्त - नैमितिक संबंध है अर्थात् निमित्त जनक है और नैमित्तिक जन्य है । निमित्त के अनुकूल जो अवस्था धारण करे वह नैमित्तिक है । प्रश्न -- जीव का निमित्त नैमित्तिक सम्बंध किसके साथ में है ? उत्तर - द्रव्यकर्म के साथ में जीव का निमित्त नैमि - तिक संबंध है। प्रश्न--आत्मा तथा द्रव्यकर्म में निमित्त - नैमित्तिक कौन है ? उत्तर - दोनों ही एक समय में निमित्त भी है और नैमित्तिक भी है। कर्म का उदय निमित्त है, और तद्रूप आत्मा का भाव होना नैमिसिक है । वही आत्मा का भाव निमित्त है और कार्माण वर्गणा का कर्म रूप अवस्था होना नैमित्तिक है । ये दोनों भाव एक ही समय में होते हैं, तो भी कारण कार्य मेद अलग है । शंका -- श्रदयिक भाव में निमित्त नैमित्तिक संबंध कैसे होता है, दृष्टान्त देकर समझाइये | Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034982
Book TitleNimitta
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBramhachri Mulshankar Desai
PublisherBramhachri Mulshankar Desai
Publication Year1955
Total Pages38
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size5 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy