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________________ (१.३) वेद वसु निधि भूमि वर्षे, मगसिर तीज उजारी रे। सेदरिया से संघ समाजे, भावी देव जुहारी रे ॥ भ०॥४॥ विद्या सागर विश्व दिवाकर, विवेकाकर निस्तारी रे । सूरीश्वरराजेन्द्र तुं साचो,मुनियतीन्द्र हितकारी रे ॥भ०॥५ महेतानीरे शुं मही मोल. ए राह--- जिनवरजीरे आदिनाथ जयकारी, सकल संघने हितकारी, आदिनाथ जयकारी ।। टेर । मुन्क मुन्क में नामना भारी रे, __सौ यात्री आवे दिल धारी रे । निशदिन गुण गावे नर नारी रे, नर नारी रे मावना भावे सारी. प्रा. १ राज राजेश्वर पय वंदे रे, वासव पण सुर वंदे रे । जय जय बोलत आनंदे रे, __ आनंदे रे भावस्तवन विस्तारी. श्रा० २ श्रीनाभिराय कुल चंदा रे, माता मोरादेवीना नंदा रे । यशधारी तेज आनंदा रे, मानंदा रे शिवरमणी भरतारी. मा० ३ ती तालथी वघावो जिवंदा रे, कापे हृदयमंल दुख फंदा रे । Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034926
Book TitleKortaji Tirth ka Itihas Sachitra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorYatindravijay
PublisherSankalchand Kisnaji
Publication Year1930
Total Pages138
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size20 MB
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