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________________ सुलतान महम्मद.] सन्मानित जैनाचार्यो [११३ णितज्ञ विद्वानोमां श्रेष्ठ ), राज-संस्तुत पेराज पातशा- (सन्मानित) मदनसूरि नामना विद्वान हना मान्य गणि- गुरु थया; तेना पद(सूरिपद)थी शोमता तज्ञ महेन्द्रसरि. महेन्द्रगुरुए परोपकार माटे कान्द १२९२=वि.सं.१४२७ मां गहन गणितशास्त्र सुयंत्रागम (यंत्रराज ) ग्रंथनी रचना करी हती. तेनी व्याख्या रचनार तेमना विद्वान् शिष्य मलयेन्दुसरिए उपयुक्त गुरु महेन्द्र सूरिने पेरोज पातशाहना सर्व गणको(गणितज्ञ विद्वानो )मां अग्रेसर तरीके सूचव्या छे.' चंद्रकीर्तिमरिना शिष्य हषकीर्तिमरिए स्त्रोपज्ञ धातुपाठवृत्ति( धातुतरंगिणी )नी प्रशस्तिमा पोताना पूर्वजोनो परिचय कराव्यो छे के१" अभूद् भृगुपुरे वरे गणकचक्रचूडामणिः कृती नृपतिसंस्तुतो मदनसुरिनामा गुरुः । तदीयपदशालिना विरचिते सुयन्त्रागमे . महेन्द्रगुरुणोदिताऽजनि विचारणा यन्त्रमा || x x श्रीपेरोजमहेन्द्रसर्वगणकः पृष्टो(क-प्रष्ठो) महेन्द्रप्रभु तिः सूरिवरस्तदीयचरणाम्भोकभृङ्गाता (ति)। सूरिश्रीमलयेन्दुना विरचितेऽस्मिन् यन्त्रराजागम___ व्याख्याने प्रविचारणादिकथनाध्यायोऽगमत् पञ्चमः ॥" विशेष माटे जुओ यंत्र राज । सुधाकरद्विवेदीद्वाग संशोधित, सं. १९३९मां काशीमां प्र.) Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034907
Book TitleJinprabhsuri ane Sultan Mahommad
Original Sutra AuthorN/A
AuthorLalchandra Bhagwan Gandhi
PublisherJinharisagarsuri Gyanbhandar
Publication Year1939
Total Pages204
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size13 MB
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