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________________ प्रश्नावली (१) तीर्थ शब्द का क्या अर्थ है ? साधारण बोलचाल में __ तीर्थ किसे कहते हैं ? कुछ उदाहरण देकर समझाओ । (२) तीर्थ क्षेत्र कैसे बनते हैं ? (३) 'सिद्धक्षेत्र', या निर्वाणक्षेत्र और 'अतिशय क्षेत्र' के बारे में संक्षेप में लिखो। (४) तीर्थक्षेत्रों पर तीर्थङ्करों अथवा महापुरुषों की मूर्तियाँ या उनके चरण चिन्ह क्यों बनाये जाते हैं ? इनका क्या उपयोग है ? २ तीर्थस्थान का महत्व और उसकी विनय । 'सिद्धक्षेत्रे महातीर्थे पुराण पुरुषाश्रिते। कल्याण कलिते पुण्ये ध्यानसिद्धि. प्रजायते॥' । -ज्ञानार्णव । 'तीर्थ' शब्द ही उसके महत्व को बतलाने के लिये पर्याप्त है। तीर्थ वह स्थान है जिसके द्वारा संसार सागर से तरा जाय । से निग्रंथस्वरूप है और वीतराग है वह जंगम प्रतिमा जिनमार्ग में मान्य है । व्यवहार में वैसी ही प्रतिमा पाषाणादि की होती हैं। Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034882
Book TitleJain Tirth aur Unki Yatra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKamtaprasad Jain
PublisherDigambar Jain Parishad Publishing House
Publication Year1946
Total Pages166
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
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