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________________ ( ११६ ) मऊ छावनी आकर उज्जैन जाना चाहिये । उज्जैन उज्जैन प्राचीन अतिशयक्षेत्र है। यहीं के स्मशान भमि में अंतिम तीर्थङ्कर भ० महावीर ने तपस्या की थी—यहीं पर रुद्र ने उन पर घोर उपसर्ग किया था । उपरान्त सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य की एक राजधानी उज्जैन थी । श्रुतकेवली भद्रबाहुजी इस भूमि में विचरे थे । प्रसिद्ध सम्राट विक्रमादित्य की लीला भमि भी यही थी । आज यहाँ बहुत-से प्राचीन खंडहर पड़े हुए हैं । स्टेशन से दो मील दर नमक मंडी में जैन धर्मशाला और मन्दिर है। दसरा मंदिर नयापुरा में है । आकाशलोचनादि देखने योग्य स्थान हैं । यहां से यात्री को भोपाल ब्राँच लाइन में मकसी स्टेशन जाना चाहिये। __ मकसी पार्श्वनाथ स्टेशन के पास ही धर्मशाला है, जहाँ से एक मील दूर कल्याणपुर नामक ग्राम है ! यहाँ भी दो दि० जैन मंदिर और धर्मशालायें हैं, जिनमें कई प्रतिमायें मनोज्ञ हैं । यहाँ एक प्राचीन जैनमंदिर है, जो पहले दिगम्बरियों का था । अब उस पर दिगम्बर और श्वेताम्बर दोनों का अधिकार है। सुबह ६ बजे तक दि० जैनी पूजन करते हैं । दर्शन हर वक्त किये जाते हैं । इस Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034882
Book TitleJain Tirth aur Unki Yatra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKamtaprasad Jain
PublisherDigambar Jain Parishad Publishing House
Publication Year1946
Total Pages166
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
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