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________________ नदी नामवालीचाडाली सादिअन्यनामावालीवि ध्याहिमा लियापार्वतीलादिपरखतनामवालीको किलामैना प्रादिपक्षीनाम वाली नागी भुजंगीआदि सर्प नामवालीमाधोदासी मीरादासी आदिप्रेष्यनाम वालीभीमकमरिचण्डिकाकालीमादिभीषणनाम वाली कन्या के साथ विवाहनकरनाचाहिये क्योकियेह नामकृसिनोर अन्यपदार्थोकेभीमाना पिता को पहलेहीध्यानरखनाचाहिये किशोर पदार्थो केनाम परसन्तानों के नामरखें॥४॥ . यव्यङ्गाडगीसौम्यनाम्नी हंसवारणागामिमीम ननुलोमकेशदशनांमुहङगीमुहहेनियमपमनुः जिसके सरलमधे अङ्गहोंविरुद्धमजिसकानामसुन्दर प्रात्यशोदासुखदासादिदोहंसम्भोर हथनीकेतुल्य जिसकीचालोसुक्षमलोमकेश औरदान्तयुक्त और जिसके सबसड़कोमलही बैसी स्त्री किसाथ विवाद करना चाहिये। प्रश्नाविवाहकासमय ओरप्रकारकौनसा अच्छाहै k ) सोलहवेवर्षसेलेकेपच्चीसवेंबर्यनककन्या ओरपञ्चीसवर्षसेलेकेश्वबर्यनकपुरुषकाबिवा हकासमय उत्तमहै इसमेंजोसोलह औरपच्चीसमें विवाहकरतो निकृष्ठ पाठारहवीसक्रीस्त्रीनीसपैनीस - . - - Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034854
Book TitleJain Aur Bauddh ka Bhed
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHermann Jacobi, Raja Sivaprasad
PublisherNavalkishor Munshi
Publication Year1897
Total Pages178
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size11 MB
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