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________________ यमुनोत्री ur Tww १६ , २० यमुनाचट्टी ६ , हनुमानचट्टी " शाम जानकीचट्टी १७ सुबह यमुनोत्री नोंध नं० (१) सत्यनारायण यह हिन्दुओंका परम पवित्र तीर्थ हैं। मूर्ति भन्य और आह्लाद उपजानेवाली है। पासमें पानीका मरना है । उसको कुण्डरूपमे बना दिया है, जिसमें यात्री स्नानकर अर्चन-पूजन करते है। यहां बाबा कालीकमलीवालेकी धर्मशाला, सदाव्रत और औषधालय है । यहांका स्टेशन रायवाला है। यहाँसे ऋषिकेश जाते हुए बीचमे बेतका जंगल बहुत आता है। (२) ऋषिकेश-यह हिन्दू धर्मका परम प्राचीन पवित्र गंगा किनारे तीर्थस्थान है। यहां राम-जानकीका मंदिर प्रसिद्ध है। मंदिरके आगे कुब्जाम्रक कुण्ड है, जिसमें यात्री स्नानकर अर्चन-पूजन करते हैं। इस मंदिरके आगे होकर गंगा बहुत प्रबल वेगमें बहती हुई मालूम होती है। यहां आत्मकल्याणके लिये साधु-संन्यासियोंका अधिक निवास रहता है। इनकी व यात्रियोंकी सेवा-शुश्रूषाके लिये राजा-महाकि भीमसेनने यहां तपस्या की थी और उनके गोडा (पैरके घुटने) टेकनेसे यह कुण्ड बन गया था और इसी कारण इसका नाम भीमगोडा पर गया । स्थान अच्छा है । हरद्वार और भीमगोड़ाके स्टेशन है। पता-पोस्ट मास्टर साहेब हरद्वार (यू० पी० ) Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034845
Book TitleHimalay Digdarshan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPriyankarvijay
PublisherSamu Dalichand Jain Granthmala
Publication Year1941
Total Pages86
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size8 MB
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