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________________ तत्त्व स्वरोदय | [ ४२ ] दिन में अपनी मृत्यु जानिये । या कुछ बडा डंडक लागे ताको साधन कहते हैं: "जो स्वर चलै सो दीजै पाँव, कहा करेगा यम का राव ।" सूर्य वासरे चन्द्र अशुभ है, चन्द्र वासरे सूर्य अशुभ है । अथ चन्द्रमा फल ( स्थिर ) को विचार :चन्द्रमा में गमन कीजै, कपड़ा पहिरिये, मँत्र कीजै, धर्म कीजै, गढ़-कोट नींव दीजै, तालाव बंधाइये, कुँवा बनवाइये, घर बंधाइये और प्रवेश कीजिये । अथ सूर्य फल :- व्यापार कीजै, भोजन कीजै, मैथुन कीजै, घोडा - हाथी सवारी कीजै, नाव पर चढिये, समर कीजै । अथ मंदाग्नि को विचार :- दहिने स्वर में भोजन कीजै, सूर्य को ऊपर देके सोइये तो अनि बढे । ' शशि सोवै सूरज भख, उभे न अँचवै नीर । कहैं कबीर वा दासको, निर्मल होय शरीर ' ॥ ३ ॥ अथ युद्ध को विचार:- जब शत्रु पर कोऊ चढै तत्र दहिने स्वर में चलै तो शत्रु को जीतै । बाँये स्वर में हारै । चाँये स्वर में घर सों निकसे तो शुभ होय । " दोनों अनी जुरे जबै, जो कोइ पूछे आय । तत्र जेही स्वर चलत होय, ते पूरा कहलाय ' ॥ ४ ॥ www.umaragyanbhandar.com Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat
SR No.034841
Book TitleGyan Swaroday
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKabir Sadguru
PublisherKabir Dharmvardhak Karyalay
Publication Year1949
Total Pages86
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size6 MB
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