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________________ तत्त्व स्वरोदय । सर्व शास्त्र को सार है, चार वेद को जीव । यह मत समय विचारि है, ताहि मिलेंगे पीव ॥ १ ॥ पवन चले पानी चले, औ पृथ्वी चलि जाय । तच्च स्वरोदय ना चले, संत लेहि अस्थाय ॥ २ ॥ शनि वासरे दहनी नाडी, कृष्ण पक्ष विशेष । गुरु, सोम वासरे बाँयी नाडी, शुक्ल पक्ष विशेष । मेष, सिंह, धन, तुला, मिथुन और कुंभ येछ राशि सूर्य – उदयकी । वृष, कन्या, वृश्चिक, मक्र, मीन और कर्क ये छ राशि चंद्र - उदयकी । संक्रान्ति लग्नः - सूर्य में जो चन्द्रमा बहै तो अशुभ है, औघट चोट होय । और कर्क, मत्र की संक्रान्ति में सूर्य बहै तो अढाई मास में अपनी मृत्यु निश्चय जानिये | और अपने लग्न में संक्रान्ति में सूर्य बहै तो जौन कार्य कीजे सो सिद्ध होय । अथ वार विचारः - सोमवार को सूर्य बहै तो कछु चिन्ता उपजावै | और मंगलको चन्द्रमा बहै तो धन की हानि जानिये | बुध को सूर्य बहै तो संगमें विग्रह जानिये | जो पल २ ऊपर को स्वर बदले, प्रमाण भर न चलै तो अढाई I Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034841
Book TitleGyan Swaroday
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKabir Sadguru
PublisherKabir Dharmvardhak Karyalay
Publication Year1949
Total Pages86
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size6 MB
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