SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 25
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ज्ञान स्वरोदय | [ २४ ] r तीन रात और तीन दिन, चालै सात वर्ष काया रहै, पीछे पांच रात औ पांच दिना, चालै संवत्सर काया रहै, पीछे दहिनो है है दहिनो दहिनो व्है है भानुकी जाय तन पंद्रह दिन निमदिन चलै, श्वास आयु जान षमास की, जीव सोलह दिन निशदिन चलै, श्वास भानुकी Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat श्वास | नास ॥८४॥ श्वास | नास ॥ ८५ ॥ ओर । छोर || ८६|| दिन तन इक आयु जान एक मास की, जीव जाय बीस दिन अरु रैन को, रवि चालै तीन मास काया रहै, फिर हैं हैं जम एक मास जो रैनदिन भान दाहिने सत्य कबीर यों कहत हैं, नर जीवें दिन नाडी जो सुषमन चलै, पांच पांच घडी सुषमन चले, तब ही नर मरि " घडी सुषमन चार में नहि चंदा नहि सूर है, नाहीं मुख सेती श्वासा चलै, घडी चार दिना कि आठ दिना, बारह के ऐसे जो चंदा चलै, आयु जान बढ़ रात को गवन बडि दिन को चंदा जो चलें, चलै तो निश्चय करि जानिये, प्राण रात चलै स्वर चंद्रमा, दिनको एक मास जो यौं चलै, छठये मासै काल ॥९४॥ सूरज भाल । www.umaragyanbhandar.com ओर । छोर || ८७|| सार । मार ||८८ || होय | दोय ॥ ८९ ॥ ठहराय । जाय ॥ ९० ॥ भाल | काल ॥ ९१ ॥ बीस । ईस ॥ ९२ ॥ सूर । दूर ॥ ९३ ॥
SR No.034841
Book TitleGyan Swaroday
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKabir Sadguru
PublisherKabir Dharmvardhak Karyalay
Publication Year1949
Total Pages86
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size6 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy