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________________ धर्मशिक्षा ९३ करते हैं, तब छाती के धडकनेके साथ गरम २ श्वास छुटता है, अहा ! वह भारतका निष्कण्टक आराम कहाँ ?, वह आराम, कहाँ किधर चलागया ? ऐसे तेजोहीन, प्रज्ञाहीन, बलहीन पुत्रोंको भारतदेवी कबसे जन्म देने लगी?; सचमुच हमारे भारतवासी लोग, विषय लम्पट हो के रमणी रमणमें अत्यासक्त हो के शोध खोल विद्या-विज्ञान के उद्यमसे जबसे प्रमादी हुए, तब. से उत्तरोत्तर सन्तान, ऐसी बलहीन उत्पन्न हुआ करती हैं कि यौवनही अवस्था में, वीर्य वृष्टि कर हतवीर्य वनती हुई शरद् ऋतु के जल रहित मेघकी तरह ऊपरका सूखा घनाटोप करती हैं। इस ब्रह्मचर्य देवता का, भारतमें, जबसे सत्कार, कम होने लगा, तबसे उसके प्रकोपित सरापसे भारतमजा विद्या विज्ञान, इस्मसे इतनी पीछे रह गई, कि जिन पर, यह सिरताजका वैभव भोगती थी, उहींके जूतों के चमडे पर हाथ फिराने तक अधम अवस्थामें आ गई। हा ! वह सिरताजका वैभव, भारत को वापिस कैसे मिले ?, वही उच्चदशा, भारतको कब प्राप्त हो ?, वह, भारतकी लक्ष्मीदेवी, भारत सन्तानों को कब दर्शन दे ?, वे अकलङ्क, भारत साम्राज्य रूपी दिनकरके प्रखर-तरुण किरण गण, अपना प्रताप, चारों तरफ कब फैलावें ?, वे, निता. न्त भासुर, विद्या कमल, जो कि अब्रह्मचर्य रूपी हिमसे भस्म प्राय बन गये हैं, फिर कब पुनरुज्जीवित बनें, भारतकी सूखी दौलतकी नदीके खोदनेका प्रतीक्ष्ण कुठार-वह ब्रह्मचर्य, भारत प्रजाके कर कमलमें फिर कब अलङ्कत हो ? । ___ भारतमें ब्रह्मचर्य देवताका, पूर्वकी तरह अगर अच्छा सस्कार होने लगजाय, तो सन्देहही क्या है कि भारत प्रजा, अपनी सिरताज वैभव की गद्दीपर, फिर आरोहण करे, और, उच्चदशा में पहुँचे । लक्ष्मीदेवीका पिता, ब्रह्मचर्य, अगर तुष्ट हो जाय,तो Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034803
Book TitleDharmshiksha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNyayavijay
PublisherGulabchand Lallubhai Shah
Publication Year1915
Total Pages212
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size15 MB
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