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एक अबोध बालक और अनसमझ ग्रामीण को भी समभा सक ऐसी सरल है।
विज्ञान सूर्य को स्थिर मानकर पृथ्वी को चर मानता है और पृथ्वी के भ्रमण के कारण ही सूर्य पूर्व से पश्चिम में दिखाई देता है तो फिर ध्र व का तारा उत्तर में ही क्यों दिखाई देता है ? भू-भ्रमणवादी इसका समाधान देते हैं किन्तु वह बुद्धिगम्य हो वैसा नहीं है । वे कहते हैं कि- पृथ्वी के उत्तर ध्र व (Northpole) की समश्रेणी में भ्र बतारा स्थित है, अतः वह पूर्व - पश्चिम परिभ्रमण करती पृथ्वी के निवासियों के लिये एक ही समान रहेगी।
। परन्तु यह समाधान पूर्ण नहीं है क्यों कि उनका मान्यता के अनुसार पृथ्वी एक घण्टे में १००० मील की गति (Speed) से चलती है। बारह घण्टों में वह सर्वथा विपरीत दिशा में आ जाती है । न्यास की दृष्टि से ८००० मील उसका स्थानान्तर होता है तथापि ध्रुव तारा वैसा का वैसा ही रहता है यह कैसे कहा जा सके ?
___ आज तो सिर के केश की परत उतार कर उसका माप तथा सिगरेट के पतले कागज की चौड़ाई में स्थित अणुओं की संख्या गिनी जा सकती है । तब ध्रव का तारा
और उसका प्रकाश जैसा है वैसा ही दिखाई देता है यह कैसे Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com