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( ५९ ) विशाल और प्राचीन मंदिर है; तथा यात्रियों के निवास के लिये धर्मशाला भी है। यहां आपके पधारने पर उदयपुर से अनुमान ३००-४०० श्रावक श्राविका दर्शनार्थ आये। यात्रा में बड़ा आनंद रहा।
यहां पर आपके उपदेश से तीर्थों की व्यवस्था के लिये " मेवाड तीर्थ कमेटी" की स्थापना हुई। उसकी पहली मीटिंग वहीं पर हुई । कमेटी के सभ्योंने मिलकर मेवाड़ प्रान्त के तीर्थों का उद्धार करने के लिये यह प्रस्ताव पास किया कि श्री करेड़ातीर्थमें जो आमदनी हो, उसका आधा भाग मेवाड़ प्रान्त के जीर्ण मंदिरों के उद्धारार्थ खर्च किया जाय।
यहां से विहार कर के आप कपासण ग्राममें पधारे । यहां पर एक जिनमंदिर और उपाश्रय है। सादड़ी मारवाड़ वालोंके यहां पर आठ-दस घर है । आप के पधारने से यहां पर धर्म की अच्छी प्रभावना हुई । यहां से आप राइमी ग्राममें पधारे । यहां स्थानकवासी और तेरहपंथी गृहस्थों के ही प्रायः अधिक घर हैं परन्तु एक मंदिर भी है। यहां पर आप ३-४ दिन ठहरे । प्रतिदिन आपका धर्मोपदेश होता रहा । आप के उपदेशमें यहां के हाकिम साहिब भी आते रहे । हाकिम साहिब बड़े योग्य पुरुष थे आपने ही महाराज को यहां पधारने की विनति की थी।
यहां पर उदयपुर नरेश के ज्येष्ठ भ्राता श्रीयुत सूरतShree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com