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________________ (१६७.) बना हुआ जो चरबी से चलती होवे जो हमारे ईमान को नुकसान पहुंचाने वाला है हरगिज़ इस्तेमाल न करेंगे। हम स्वदेशी पाक वस्त्र रोजाना पहनने के इलावा दीगर रसूमातमें भी इस्तेमाल करेंगे, नीज़ मैं जहां जहां अपने मुरीदों के पास जाऊंगा उनको भी यही हिदायत करूंगा । उमीद है कि मेरे कुलमुरीद मेरे हुकुम के कारबंद होंगे ओर नापाक चीज़ अपने खाने में नहीं लावेंगे लिहाजा यह याददाश्त आपकी नज़र करते हैं। उम्मीद है कि आप इसे मनजूर फरमायेंगे। मुवर्खा १७ जौलाई १९२२. __ ह. पीर अहमदशाह बकलमखुद । नामों की सूचीः मेहरदीन अराईं, मुहम्मद असमाईलदरजी, मिस्त्री फ़ज़ल अहमद, फ़जलदीन, रमज़ान, जलालदीन, कायमदीन, हाकिमगूजर, छांगा अराई. मेहरदीन, हुकमदीन, इलमदीन अराई वल्द इमाम बख्श, जगन्नाथ ब्राह्मण, गुलाम हैदर कर्मदीन काशमीरी, हैदर अली माशकी, बुढा कशमीरी, लब्भूखां, सोहना हजाम, हुसैनशाह फकीर, अब्दुरहेमान वल्द करीम दीन, जानमहम्मद अराई, सराजबेग, बागचूड़गर ! उमरदीन, मुहम्मददीन अराई । अल्लारखा काशमीरी, सुलतान, फ़ज़लदीन दर्जी, इलमदीन मुहम्मददीन लुहार, दूला, इमाम चिरागदीन, कादिरबख्श, इमामदीन कश्मीरी, ताजदीन, अब्दुलगनी Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034725
Book TitleAdorshopadhyay arthat Sohanvijayji Maharaj ka Jivan Vruttant
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHansraj Pt
PublisherAtmanand Jain Sabha
Publication Year1936
Total Pages254
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size30 MB
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