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________________ (१४७) वर्तमान आर्यसमाज" इस विषय पर बोलते हुए आर्यसमाजके पोले सिद्धान्तों की बड़ी सुन्दरतासे समालोचना की। ___ यहां पर दिगम्बर समाज का अधिक प्राबल्य है; श्वेताम्बरों के तो केवल ४-५ घर हैं । यहां से अम्बाला पधारे । अम्बाले में कुछ दिन तक ठहर कर राजपुरा होते हुए आप पटियाले में पधारे । यहां पर आप लाला० मुरारीलालजी अग्रवाल के मकान में ठहरे । यहांपर स्थानकवासियोंका समुदाय कुछ अधिक है। जिसमें अधिकांश अग्रवाल ही हैं। खंडेरवाल जैनों के प्रायः तीन चारही घर हैं । इनके अलावा उनदिनों लुधियानेके बाबू कृष्णचन्दजी शर्मा वकील, जोकि एक चुस्त जैन हैं वहांपर मौजूद थे। पहले ये कट्टर आर्यसमाजी थे। चर्चा करने में इनकी बुद्धि बहुत चपल थी। ये आर्यसमाज का पक्ष लेकर हर किसी से भिड़ जाते थे। ___एक दिन ये स्वर्गीय आचार्य श्री १००८ विजयान्दसूरि (आत्मारामजी) महाराजके पास शास्त्रार्थके निमित्त आये। परन्तु उनकी युक्तियों और सदुपदेशने आपके विचारोंको एकदम बदलदिया । तबसे आप जैन धर्म के अनुयायी हो गये । ये वकील साहेब भी आपके व्याख्यान-उपदेशमें हरवक्त शामिल रहते थे। यहांपर चार पांच दिन धर्मोपदेश देकर आप समाना Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034725
Book TitleAdorshopadhyay arthat Sohanvijayji Maharaj ka Jivan Vruttant
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHansraj Pt
PublisherAtmanand Jain Sabha
Publication Year1936
Total Pages254
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size30 MB
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