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________________ इसके अतिरिक्त आपके सदुपदेशसे बहुतसे लोगोंने मांस और मदिराका परित्याग किया। यहांसे विहार करके अनेक ग्रामों में धर्मप्रचार करते हुए आप अम्बालामें पधारे। अम्बाला श्री संघने आपका खूब जी खोलकर स्वागत किया। यहांपर जिनेन्द्र भगवान् का परम सुन्दर और विशाल मन्दिर अपनी शानका एक ही है । जैन गृहस्थोंके घर भी यहांपर काफी हैं । इसके अलावा श्री आत्मानन्द जैन हाईस्कूल, श्री जैन कन्यापाठशाला, लायब्रेरी और श्री आत्मानन्द जैन टेक्टसोसायटी आदि कईएक संस्थाएँ अच्छी तरह चल रही हैं । आपके पधारने से लोगोंमें बहुत उत्साह बढ़ा । कईएक सज्जन श्री आत्मानन्द जैन महासभाके लाइफ मेम्बर बने । कईएक प्रकारके सामाजिक सुधार हुए। यहां से साढौरा श्री संघकी प्रार्थनासे आप वहां पधारे । यहांके लोगोंने खूब प्रेमभाव प्रकट किया। यहांपर श्वेताम्बर जैनोंके घर तो कुल चार ही हैं; आपके स्वागतमें दिगम्बर, श्वेताम्बर, स्थानिकवासी, और हिन्दू-मुसलमान सब जातिके लोगोंने भाग लिया। तथा स्कूलके डेढ़सौके करीब लड़के भी आपके स्वागतमें सम्मिलित हुए। यहांपर आपके ३ सार्वजनिक व्याख्यान हुए। (एक स्कूलमें , दूसरा दिगम्बर जैन सजनके मकानमें, तीसरा ला० Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034725
Book TitleAdorshopadhyay arthat Sohanvijayji Maharaj ka Jivan Vruttant
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHansraj Pt
PublisherAtmanand Jain Sabha
Publication Year1936
Total Pages254
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size30 MB
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