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________________ ( ९८ ) ख़ातिर करें; किसी अनाथप्राणीको मारकर मेहमानों की खातिर करना अब मुझे मंजूर नहीं ? बस फिर क्या था उन बेचारे अनाथ जीवोंको अभयदान मिल गया । इसके अलावा कई लोगोंने विदेशी खांडका परित्याग किया । शुद्ध स्वदेशी वस्त्रोंके पहनने का नियम लिया । आपकी आत्मामें धर्म, समाज और देशकी सेवा कूट २ कर भरी हुई थी । आप रास्ते चलते हुए भी उपदेश देते रहते थे । आपके उपदेशसे सैंकड़ों लोगोंने मदिरा त्यागकी प्रतिज्ञा ली । सैंकड़ोंने मांसाहारका आजीवन परित्याग किया । 66 ॥ सनखतरे में चतुर्मास ॥ गृहानपैतुं प्रणायादभीप्सवो, भवन्ति नापुण्यकृतां मनीषिणः । " गुरुदेव उस समय अम्बाले में विराजमान थे । सनखतरेके हिन्दु - मुसलमान, जैन आदि सज्जन वहां जाकर गुरुमहाराज से आपके लिये सनखतरे में चतुर्मास करनेकी आज्ञा ले आये । तदनुसार आपने उस तरफ़ विहार किया । नारोवालसे आप किला सोभासिंह में पधारे। यहांपर लाला सदानंदजीके परिश्रमकी यादगार रूप एक जिनमन्दिर है । यहांपर स्याल Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034725
Book TitleAdorshopadhyay arthat Sohanvijayji Maharaj ka Jivan Vruttant
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHansraj Pt
PublisherAtmanand Jain Sabha
Publication Year1936
Total Pages254
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size30 MB
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