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________________ ( ८९ ) ख्यानों का प्रबन्ध यहां के स्कूल के हैडमास्टर स्यालकोट निवासी लाला किशनचन्दजीने किया था । आपके व्याख्यानोंसे यहां पर आशातीत लाभ पहुंचा। यहांसे आप खानगाह डोगरों पधारे । व्याख्यानमें सैंकड़ो जैनेतर सज्जनों को लाभ मिला। यहां पर बीकानेर निवासी शा. मोतीलाल और उनकी माता डाबी बाई आदि १०-१५ स्त्री-पुरुष आपके दर्शनों के लिये आये। यहांसे विहार कर के आप लाहौरमें पधारे। यहां मद्राससे सेठ फतेहचन्दजी संघवी आपके दर्शनार्थ आये । लाहौरमें भी सामाजिक सुधार संबन्धी अच्छा आन्दोलन हुआ। लाहौर से विहार कर के अमृतसर जंडियाला और जालंधर-कारपुर आदि नगरोंमें धर्मोपदेश देते हुए आप आदमपुर ( द्वाबा ) में पधारे । श्री गुरुदेवके दर्शन । बीकानेर से विहार करके यहांपर पूज्य गुरुदेव भी, पं. श्री ललितविजयजी तथा पं. श्री विद्याविजयजी आदि परिवार के साथ पधारे । वरकाणाजी के बाद यहांपर गुरुदेव के प्रथम दर्शन हुए । पंजाब के श्री संघमें इसवक्त अपूर्व उत्साह था, क्योंकि प्रायः १२-१३ वर्षके बाद गुरु महाShree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034725
Book TitleAdorshopadhyay arthat Sohanvijayji Maharaj ka Jivan Vruttant
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHansraj Pt
PublisherAtmanand Jain Sabha
Publication Year1936
Total Pages254
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size30 MB
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