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________________ ( ८५ ) यहांसे आप लाहौरमें आये । लाहौर निवासियों ने भी बड़े ठाठसे आपका स्वागत किया । लाहौरसे चल कर आप बड़े गुरुमहाराजके स्वर्गीयधाम गुजरांवाला में पधारे । प्रथम आपने स्वर्गीय जैनाचार्य श्री १००८ श्रीमद्विजयानन्दसूरि उर्फ आत्मारामजी महाराजके-पुण्य समाधि मंदिरके दर्शन किये । उसके बाद अपने वयोवृद्ध और चारित्रवृद्ध स्वामी श्री सुमतिविजयजी (जोकि वहां विराजमान थे ) के दर्शनोंका लाभ उठाया। गुजरांवाला श्री संघने भी आपके स्वागत करने में कोई कमी नहीं रखी । सैंकड़ों स्त्री पुरुष आपके दर्शनोंके लिये रास्ते में उपस्थित थे। ___ गुरु जयन्ती समारोह ॥ " जब तुम जन्मे जगतमें जगत हँसा तुम रोये, ऐसी करनी कर चलो कि तुम हँस मुख, जगरोये " _ यों तो गुजरांवाले में हरसाल जयन्ती महोत्सव मनाया ही जाता है, परन्तु इस वर्ष गुरु जयन्तीका ठाठ कुछ निराला ही था । बाहरकी कईएक भजन मंडलियाँ और हजारों स्त्री पुरुष आये हुए थे । उत्सवका नगर-कीर्तन बड़ी धूम धामसे हुआ। सभामंडपमें स्वर्गीय आचार्य श्री १००८ श्रीमद्विजयानन्दसूरि उर्फ आत्मारामजी महाराजकी स्मृतिमें Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034725
Book TitleAdorshopadhyay arthat Sohanvijayji Maharaj ka Jivan Vruttant
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHansraj Pt
PublisherAtmanand Jain Sabha
Publication Year1936
Total Pages254
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size30 MB
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