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________________ ( ७९ ) विषय में लोगोंकी जो कई प्रकारकी विपरीत विचारणा थी, वह बहुत हदतक दूर हो गई। लोगों को जैनधर्म के वास्तविक स्वरूप का कुछ पता हो गया। यहांपर आप अनुमान १५ दिन ठहरे । जीरा निवासियों की अधिक प्रार्थनासे आपने यहांसे जीराकी तरफ विहार किया । फाजलकासे आप फरीदकोट पधारे । फरीदकोट में स्थानकवासी सज्जनों की ही बस्ती है। एक मन्दिर भी है, परन्तु पूजा वगैरह का कोई भी उचित प्रबन्ध नहीं है। ___ यहांपर भी आपका एक उपदेश हुआ । यहांसे चांदा आदि होते हुए आप मुदकी पधारे । यह स्थान पंजाबका सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक रणक्षेत्र है । यहांपर यद्यपि श्रावकों का एक भी घर नहीं है परन्तु जैनेतर लोगोंने आपका बहुत अच्छा स्वागत किया। आपके यहांपर दो व्याख्यान हुए, लोगोंने आपके उपदेशसे खूब लाभ उठाया । यहांसे तलवंडी और लहरा आदि ग्रामोंमें होते हुए आप जीरामें पधारे । जीरा निवासियोंने आपका जी खोलकर स्वागत किया आपके प्रवेशके समय सैंकड़ों स्त्रीपुरुषों * लहराग्राम पूज्यपाद स्वर्गीय आचार्य श्री १००८ विजयानन्दसूरि उर्फ आत्मारामजी महाराज की पवित्र जन्भूमि है, यहींसे जैनधर्म का तेजस्वी दिवाकर उदय हुआ था । Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034725
Book TitleAdorshopadhyay arthat Sohanvijayji Maharaj ka Jivan Vruttant
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHansraj Pt
PublisherAtmanand Jain Sabha
Publication Year1936
Total Pages254
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size30 MB
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