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________________ आगम सूत्र ५, अंगसूत्र-५, 'भगवती/व्याख्याप्रज्ञप्ति-1' शतक/शतकशतक/उद्देशक/ सूत्रांक और कोई न छिन्न होता है, न भिन्न होता है। जिस प्रकार छेदन-भेदन के विषय में प्रश्नोत्तर किये गए हैं, उसी तरह से अग्निकाय के बीच में प्रवेश करता है। इसी प्रकार के प्रश्नोत्तर कहने चाहिए । किन्तु अन्तर इतना ही है कि जहाँ उस पाठ में सम्भावित छेदन-भेदन का कथन किया है, वहाँ इस पाठ में जलता है इस प्रकार कहना । इसी प्रकार पुष्कर-संवर्त्तक नामक महामेघ के मध्य में प्रवेश करता है, इस प्रकार के प्रश्नोत्तर कहने चाहिए । किन्तु वहाँ सम्भावित छिन्न-भिन्न होता है के स्थान पर यहाँभीग जाता है, कहना । इसी प्रकार गंगा महानदी के प्रतिस्रोत में वह परमाणुपुद्गल आता है और प्रतिस्खलित होता | इस तरह के तथा उदकावर्त्त या उदकबिन्दु में प्रवेश करता है, और वहाँ वह विनष्ट होता है, (इस तरह के प्रश्नोत्तर कहना ।) सूत्र-२५५ __भगवन् ! क्या परमाणु-पुद्गल सार्ध, समध्य और सप्रदेश है, अथवा अनर्द्ध, अमध्य और अप्रदेश हैं ? गौतम ! (परमाणुपुद्गल) अनर्द्ध, अमध्य और अप्रदेश है, किन्तु, सार्द्ध, समध्य और सप्रदेश नहीं है । भगवन् ! क्या द्विप्रदेशिक स्कन्ध सार्ध, समध्य और सप्रदेश हैं, अथवा अनर्द्ध, अमध्य और अप्रदेश हैं ? गौतम ! द्विप्रदेशी स्कन्ध, सार्ध, अमध्य और सप्रदेश हैं, किन्तु अनर्ध, समध्य और अप्रदेश नहीं है। भगवन् ! क्या त्रिप्रदेशी स्कन्ध सार्ध, समध्य और सप्रदेश हैं, अथवा अनर्द्ध, अमध्य और अप्रदेश हैं । गौतम! त्रिप्रदेशी स्कन्ध अनर्ध है, समध्य है और सप्रदेश है; किन्धु सार्ध नहीं है, अमध्य नहीं है, और अप्रदेश नहीं है। द्विप्रदेशी स्कन्ध के समान समसंख्या वाले स्कन्धों के विषय में कहना चाहिए । तथा विषमसंख्या वाले स्कन्धों के विषय में त्रिप्रदेशी स्कन्ध के अनुसार कहना चाहिए। भगवन् ! क्या संख्यात-प्रदेशी स्कन्ध, सार्ध, समध्य और सप्रदेश है, अथवा अनर्ध, अमध्य और अप्रदेश है? गौतम ! वह कदाचित् सार्ध होता है, अमध्य होता है, और सप्रदेश होता है, और कदाचित् अनर्ध होता है, समध्य होता है और सप्रदेश होता है। जिस प्रकार संख्यातप्रदेशी स्कन्ध के समान असंख्यातप्रदेशी और अनन्त-प्रदेशी स्कन्ध के विषय में भी जानना। सूत्र - २५६ भगवन् ! परमाणुपुद्गल, परमाणुपुद्गल को स्पर्श करता हआ १-क्या एकदेश से एकदेश को स्पर्श करता है ?, २-एकदेश से बहुत देशों को स्पर्श करता है ?, ३-अथवा एकदेश से सबको स्पर्श करता है ?, ४-अथवा बहुत देशों से एकदेश को स्पर्श करता है ?, ५-या बहुत देशों से बहुत देशों को स्पर्श करता है ?, ६-अथवा बहुत देशों से सभी को स्पर्श करता है ?, ७-अथवा सर्व से एकदेश को स्पर्श करता है ?, ८-या सर्व से बहुत देशों को स्पर्श करता है ? अथवा ९-सर्व से सर्व को स्पर्श करता है ? गौतम ! (परमाणुपुद्गल परमाणुपुद्गल को) १. एकदेश से एकदेश को स्पर्श नहीं करता, २. एकदेश से बहुत देशों को स्पर्श नहीं करता, ३. एकदेश से सर्व को स्पर्श नहीं करता, ४. बहुत देशों से एकदेश को स्पर्श नहीं करता, ५. बहुत देशों से बहुत देशों को स्पर्श नहीं करता, ६. बहुत देशों से सभी को स्पर्श नहीं करता, ७. न सर्व से एकदेश को स्पर्श करता है, ८. न सर्व से बहुत देशों को स्पर्श करता है, अपितु ९. सर्व से सर्व को स्पर्श करता है। इसी प्रकार द्विप्रदेशी स्कन्ध को स्पर्श करता हुआ परमाणु-पुद्गल सातवे अथवा नौवे, इन दो विकल्पों से स्पर्श करता है । त्रिप्रदेशी स्कन्ध को स्पर्श करता हुआ परमाणुपुद्गल (उपर्युक्त नौ विकल्पों में से) अन्तिम तीन विकल्पों से स्पर्श करता है। जिस प्रकार एक परमाणुपुद्गल द्वारा त्रिप्रदेशीस्कन्ध के स्पर्श करने का आलापक कहा गया है, उसी प्रकार एक परमाणुपुद्गल से चतुष्प्रदेशीस्कन्ध, पंचप्रदेशी स्कन्ध यावत् संख्यातप्रदेशी स्कन्ध, असंख्यातप्रदेशी स्कन्ध एवं अनन्तप्रदेशी स्कन्ध तक को स्पर्श करने का आलापक कहना। भगवन् ! द्विप्रदेशी स्कन्ध परमाणुपुद्गल को स्पर्श करता हुआ किस प्रकार स्पर्श करता है ? हे गौतम (द्विप्रदेशी स्कन्ध परमाणुपुद्गल को) तीसरे और नौवें विकल्प से स्पर्श करता है । द्विप्रदेशीस्कन्ध, द्विप्रदेशीस्कन्ध को मुनि दीपरत्नसागर कृत् "(भगवती) आगमसूत्र-हिन्द-अनुवाद" Page 102
SR No.034671
Book TitleAgam 05 Bhagwati Sutra Part 01 Hindi Anuwad
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDipratnasagar, Deepratnasagar
Publication Year2019
Total Pages250
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 05, & agam_bhagwati
File Size6 MB
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