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________________ श्वेताम्बर तेरापंथ-पत समीक्षा । ८५ RAKAK K AKERAK-4. तेरापंथियोंसे प्रश्न. अब हम इस पुस्तककी पूर्णाहुतिमें समस्त तेरापंथियोंसे निम्न लिखित प्रश्न पूछते हैं । आशा है कि-चे, इन प्रश्नोंके उत्तर, उनके माने हुए बत्तीससूत्रोंके मूल पाठसे ही देंगे। १'श्वेताम्बर तेरापंथी' ऐसा कहने में तुम्हारे पासमें शास्त्रीय क्या प्रमाण है? जो प्रमाण होवे सो दिखलाओ। अ. गर श्वेतवस्त्र धारण करनेसे ही श्वेताम्बर होनेका दावा रखते हो, तो ऐसे तो दादु पंथी वगैरह जो २ श्वेतवस्त्र रखते हैं, वे सभी श्वेताम्बर कहे जा सकते हैं। २ इतिहाससे तुम्हारे मतको प्राचीन सिद्ध कर सकते हो ? अगर कर सकते हो तो कर दिखलाओ। ३ 'बत्तीस ही सूत्रमानने, अधिक नहीं,' यह बात कौनसे सूत्रमें लिखी है ? । तथा तुम्हारे माने हुए बत्तीस सूत्रमें, दुसरे जिन २ सूत्रोंके नाम आवें, उन २ सूत्रोंको क्यों नहीं मानना? ___४ महावीर स्वामी चूके' ऐसा अपने आपसे कहते हो ? या किसी सूत्रमें भी कहा है ? सूत्रमें कहा हो तो, उस सूत्रके नामके साथ पाठ दिखलाओ। ५ सालमें दो दफे पाटमहोत्सव करते हो, यह विधि कोनसे सूत्रमें लिखी है ? ६ तुम्हारे साधु दो-ढाई हाथका आधा रखते हैं, यह किस सूत्रके कौनसे पाठके आधारसे रखते हैं ? .. Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034617
Book TitleShwetambar Terapanth Mat Samiksha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVidyavijay
PublisherHarshchandra Bhurabhai Shah
Publication Year1914
Total Pages98
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size18 MB
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