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________________ राष्ट्रकूटों का इतिहास पहला, देवली से मिला, ताम्रपत्र श. सं. ८६२ । वि. सं. १९७-ई. स. १४० ) का है । इस में जिरा दान का उलंब है, यह रा ( कृष्णा तृतीय) ने अपने मृत-भ्राता जगत्तुङ्ग की यादगार में दिया था। पहला, सालोटगी ( बीजापुर ) मे मिला, लेग्वं श. सं. ८६७ ( वि. मं. १००२-ई. म. २१५ ) का है। इसमें इसके मंत्री नारायण द्वारा स्थापित पाठशाला का उल्लेग्व है । उसमें अनेक देशों के विद्यार्थी आकर विद्याध्ययन किया करते थे। दूसरा, शोलापुर से मिला, लेख श. सं. ८७१ ( वि. सं. १००६ ई. स. १४६ ) का है। इसमें इसको "चक्रवर्ती" लिखा है। तीसरा, आतकूर ( माइसोर ) से मिला, लेख श. सं. ८७२ ( वि. सं. १००७-ई. स. १५०) की है । इससे प्रकट होता है कि, कृष्ण तृतीय ने, चोल-राज राजादित्य के मारने के उपलक्ष में, पश्चिमी गङ्ग-वंशी राजा भूतुग द्वितीय को बनवासी आदि प्रदेश उपहार में दिये थे। ___चौथा, सोरटूर ( धारवाड़ ) से मिला, लेखे श. सं. ८७३ ( वि. सं. १००८ ई. स. १५१ ) का है । और पांचवां, शोलापुर से मिला, लेख श. सं. ८७५ ( वि. सं. १०१४ ई. स. १५७ ) का है । छटा, चिंचली मे मिला, लेवं श. सं. ८७६ ( वि. सं. १०११ ई. स. १५४ ) का है। (१) ऐपिग्राफिया इण्डिका. भा०५, पृ० ११२ (२) ऐपिग्राफिया इगिडका, भा० ४, पृ०६. ( ३ ) ऐपिग्राफिया इगिडका, भा० ७, पृ. १६४ (४) ऐपिग्राफिया इगिडका, भा॰ २, पृ० १७१ (५) इण्डियन ऐगिटक्केरी, भा• १२, पृ. २५७ (६) ऐपिग्राफिया इपिडका, भा० ७, पृ. १९६ (७) कीलहान लिस्ट प्रॉफ दि इम्मकिपशन्स ऑफ सदर्न इण्डिया, नं. ६५ Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034595
Book TitleRashtrakuto (Rathodo) Ka Itihas
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVishweshwarnath Reu
PublisherArchealogical Department Jodhpur
Publication Year1934
Total Pages182
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size27 MB
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