SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 406
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ( ५१ ) अद्धा कालके दश पञ्चखाण = यथा (१) नमुकारसी, सूर्य उदय होनेसे ४८ मिन्ट जिस्मे आगार दोय नम्बर १-२ (2) नमुकारसी मुठसी = नमुकारसीसे अधिक जितना काळ प्रत्याख्यान रहे अर्थात् प्रत्याख्यान पारनेके लिये मुठी न वाले वहांतक | इस्मे आगार च्यार होते है नम्बर १-१-१-४ (३) पौरखी साठ पौरवी = दिनका भागकी पौरखी कि साठ पौरखी इस्मे आगार नम्बर १-१-३-४-९-६-७ (४) पुरमंड = दिन भाग इस्मे आगार पौरषीवत (५) एकासनानारसी, पौरषो, पुरीमंडसे होते है जिसमे आगार सात पौरषीवत् विगइके प्रत्याख्यानमें आगार नम्बर ८९-१०-११-१२ एकासना के आगार नं० १३-१४-१५ (६) आयंबिल = नमुकारसी पौरषीसे होते है आगार ७ पौरषोबत ५ विगइवत १३ एकासनावत् कुल १५ आगार होते है । (७) निर्विगई - छे विगई वर्जना आगार पूर्ववत (८) एकलठाणा - एकासनावत् परन्तु जहांपर भोजन किये है वहां पर पाणी भी पीलाया दुसरी दफे आहार पाणी नहीं कर सक्के है । (९) अभिग्रह प्रत्याख्यान - विविध प्रकारके अभिग्रह किये जाते है जिसमे सागार हो तो १-२-३-४ नम्बरके और मना
SR No.034235
Book TitleShighra Bodh Part 21 To 25
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGyansundar
PublisherSukhsagar Gyan Pracharak Sabha
Publication Year
Total Pages419
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy