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________________ ( ?? ) : (१०) तीन वैकलेन्द्रिय मरके पांच स्थावर तीन वैकलेन्द्रिय तीच पांचेन्द्रिय और मनुष्य में जावे । स्थिति यहांकि तथा वहांकि स्व स्व स्थान माफीक । भव च्यार स्थावरमें । असंख्याते 'तीन वैकलेन्द्रियमें संख्पाते । वनास्पति में अनन्ते । तीर्थच पांचन्द्रिय तथा मनुष्य में आठ भव और जघन्य सब स्थान पर दोक भव समझना । काल स्वस्व स्थान कि जघन्य उत्कृष्ट स्थिति प्रमाणे समझना • (११) तीयंच पांचेन्द्रिय मरके दश स्थान = पांच स्थावर तीन वैकलेन्द्रिय तीच पांचेन्द्रिय और मनुष्यमें जावे स्थिति पूर्ववत् भव ज० दोय उत्कृष्ट आठ भव करे काल पूर्ववत् निजोयोगसे समझना । (१२) मनुष्य मरके, तीन स्थावर, तीनवैकलेन्द्रिय, तीर्यच. पांचेन्द्रिय, मनुष्य एवं आठ स्थानमे जावे। स्थिति पूर्ववत् भक ज० दोय उ० आठ भव करे । (१) मनुष्य मरके तेउकाय वायुकायमे जावे स्थिति पूर्ववत मय ज० उ० दोय भव करे । कारण तेउ वायु मरके मनुष्य न होवे | नोट - ऊपर वैकलेन्द्रिय में उत्कृष्ट संख्यातेभव च्यार स्थावरमें असंख्याते और वनस्पतिमें अनन्ते भव जो कहा है वह पहला दुसरा चोथा पांचवा यह च्यार गमाकि अपेक्षा है शेष ३-६८-९ इस पांच गमा में जघन्य दोय भव उ० आठ भक करते है ।
SR No.034235
Book TitleShighra Bodh Part 21 To 25
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGyansundar
PublisherSukhsagar Gyan Pracharak Sabha
Publication Year
Total Pages419
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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