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________________ (४) (१) उत्पात-नीव नरकादि गतिमें उत्पन्न होता है वहा कहासे नाता है जैसे रत्नप्रभा नरकमे जानेवाला, मनुष्य तीयच हैं, . . (२) परिमाण-एक समयमें कितने जीव. जा-के उत्पन्न होता है (३) संहनन-कितने संघयण वाला जाके , (४) अवगहाना-कितनि अवग्गहान वाला. , (५) संस्थान-कितना संस्थानवाला.. ... (६) लेश्या कितनी लेश्यावाला . (७) द्रष्टी कितनी द्रोष्टी वाला .. (८) ज्ञान-कितने ज्ञानाज्ञान वाला (९) योग-कितने योगवाला जीव (१०) उपयोग-कितने उपयोगवाला (११) संज्ञा-कितने संज्ञावाला (१२) कषाय-कितनि कषायवाला (१३) इन्द्रिय-कितनि इन्द्रियवाला (१४) समुग्धातवा-कितनी समु० वाला (१५) वेदना-कितनी वेदनावाला .. (१६) वेद-कितनी वेदवाला (१७) स्थिति-कितनि स्थितिवाला . (१८) अध्यवशाया-केसे अध्यशायवाला (१९) अनुबन्ध-कितना अनुबन्धवाला , .. (२०) संभहो-कितना भव और काल लागे ..
SR No.034235
Book TitleShighra Bodh Part 21 To 25
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGyansundar
PublisherSukhsagar Gyan Pracharak Sabha
Publication Year
Total Pages419
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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