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________________ (१००) योगचितामणिः। , [चूर्णाधिकारः: आठ भाग कैथ और छ: भाग मिश्री, अनारदाना, तन्तडीक, बेलगिरी, धायके फूल, अजमोद, पीपल ये प्रत्येक तीन तीन भाग लेवे, सुगंधवाला, कालानोन, अजमायन, चातुर्जात, चीता, सोंठ इन सब औषधियोंको दो दोभाग ल सूक्ष्म चूर्ण कर मिश्री मिलावे । यह चूर्ण दुष्ट जल के रोग, संग्रहणी और अतीसारको दूर करता है ॥ १-४ ॥ यवान्यादिचूर्ण। यवानीपिप्पलीमूलचातुर्जातकनागरैः। मरिचन्द्रयवाजाजीधान्यसौवर्चलैः समः॥१॥ वृक्षाम्लधातकीकृष्णाबिल्वदाडिमदीपकैः । त्रिगुणैः षड्गुणैः सिद्धैः कपित्थोऽष्टगुणः स्मृतः॥२॥ चूर्णमतीसारग्रहीक्षयगुल्मगलामयान् । , कासश्वासानिमन्दार्शः पीनसारोचकाञ्जयेत् ॥ ३॥ अजमायन, पीपलामूल, चातुर्जात, सोंठ, मिरच, इन्द्रजव, जीरा, धनिया कालानोन य सब समान लेवे । अमलवेत, धायके फूल, पीपल, बेल, अनारदाना, अजमोद ये सब हरएक तिगुनी लय और मिश्री छः गुनी लेवे, कैथके आठ भाग लेवे । यह चूर्ण अतीसार, ग्रहणी, क्षय, गुल्म, गोलेके रोग, खांसी, श्वास, मन्दाग्नि, अर्श, पानस, अरुचि आदिको दूर करता है ॥ १-३ ॥ दाडिमाष्टकचूर्ण। दाडिमस्य पलान्यष्टौ शर्करायाः पलाष्टकम् । । पिप्पली पिप्पलीमूलं यवानी मरिचं तथा ॥ १ ॥ धान्यकं जीरकं शुण्ठी प्रत्येकं पलसम्मितम्। कर्षमात्रा तुगाक्षीरी त्वक्पत्रैलाश्च केशरम् ॥२॥ Aho! Shrutgyanam
SR No.034215
Book TitleYog Chintamani Satik
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHarshkirtisuri
PublisherGangavishnu Shrikrishnadas
Publication Year1954
Total Pages362
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size14 MB
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