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________________ (९५) श्न, ण, स्त्र, रु, मने क्ष्ग, डाक्षराने महसे ण्ह थाय छ भो, श्न-पण्हो, (प्रश्नः); ष्ण-विण्हू (विष्णुः); कण्हो (कृष्ण:); उण्हीसं (उष्णीषं); स्त्र-जोण्हा (ज्योत्स्ना); ण्हाऊ (स्नायुः); ग्रहाणं (स्नान); ह्र-वण्ही ( वह्निः); जण्हू (जनुः); ह-पुव्वण्हो ( पूवाङ्गः ); अवरणहो (अपराण:); क्ष्ण-सहं (श्लक्ष्ण); तिण्हं (तीक्ष्णं). ३२ ॥ श्म, ष्म, स्म, मां न्हः ॥ २-७४ श्मादीनां संयुक्तानां स्थाने मकाराकान्तो हकार आदेशो भवति । . इम, म, स्म, मने , साक्षरीने पहले म्ह थाय छ सम, इम-कम्हारो (काश्मीरः); ष्म-गिम्हो (ग्रीष्मः); उम्हं (उष्प); स्म-अम्हारिसो (अस्मादृशः); विम्हओ (विस्मयः); मबम्हा (ब्रह्मा); सुम्हो ( सुमः) बम्हणो (ब्राह्मणः); बम्हचेरं (ब्रह्मचर्य ). ... कचिद् म्भोऽपि दृश्यते । टसा शहीमा मने पहले म्भ थायछ भ, बम्भचेरं (ब्रह्मचर्य). कचिन् न भवति । साये। शहीमा २सूत्रमा डेत। नियम सा पडता नथी; बम, रस्मी (रश्मिः); सरो (स्मरः). ३३ ॥ ह्यस्य झः॥२-२६ ह्यस्य स्थाने झ इसादेशो भवति ।
SR No.023387
Book TitleLaghu Ane Bruhat Prakrit Vyakaran
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDalichand Pitambardas
PublisherDalichand Pitambardas
Publication Year1905
Total Pages574
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size23 MB
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