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________________ १२ 1 गये । गले में, बढ़िया - बढ़िया - मोतियों की मालाएँ पहनाई गईं । शरीर पर, अत्यन्त - सुगन्धित चन्दन का लेप किया गया । एक, अद्भुत सामग्रियों से सजे हुए सुन्दर - रथ में, दो सफेद घोड़े जोते गये और श्री नेमिनाथजी को उस रथ में बैठा या गया । आगे-आगे, बाराती चले। दोनों तरफ हाथियों पर चढ़कर अमीर-उमराव लोग चले । रथ के पीछे, राजा समुद्र विजय तथा उनके भाई चले । इनके पीछे, पालकियों में बैठकर, मीठे-मीठे गीत गाती हुई, रानियें चलीं । इस बरात की अपार - शोभा का वर्णन कैसे किया जा सकता है ? बरात, धीरे-धीरे चलने लगी । नगर के लोग, इस बरात को देखने के लिये, झुण्ड के झुण्ड एकत्रित हुए । मकानों की मंजिलें तथा छतें, बच्चों एवं स्त्रियों से खचाखच भरी थीं । बाजारों में, पुरुषों का पार ही न था । 1 इस तरह, अपनी सुन्दरता से, देखनेवालों के चित्त प्रसन्न करती हुई वह बरात, घोरे-धीरे राजा उग्रसेन के महल के समीप पहुंचने लगी । इवर, राजमती भी सोलह श्रृङ्गार सजकर, --
SR No.023378
Book TitleHindi Granthavali
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDhirajlal Tokarshi Shah, Bhajamishankar Dikshit
PublisherJyoti Karayalay
Publication Year1932
Total Pages398
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size17 MB
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