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________________ क्रियातिपत्त्यर्थ एकवचन हंसाविन्तो, हासन्तो हसाविन्ती, हासन्ती नपुंसकलिंग - हसाविन्तं, हासन्तं पुंलिंग - स्त्रीलिंग - सर्वपुरुष | हसाविज्ज-ज्जा, हासेज्ज-ज्जा सर्ववचन धातु अंग हसावि-हास अंग बहुवचन हसाविन्ता, हासन्ता हसाविन्तीओ, हासन्तीओ हसाविन्ताइं, हासन्ताइं इत्यादि कर्तरि के समान जानना । अ विध्यर्थवर्तमानकाल भूतकाल आज्ञार्थ कर् करावीअ करावीअइ करावीअईअ करावीअउ कराविहिइ, करावितो - ती-तं कराविज्ज-ज्जा कराविस्सइ कराविज्ज कराविज्जइ कराविज्जईअ कराविज्जउ कराविहिइ, कराविन्तो-न्ती-तं कराविस्सइ कराविज्ज-ज्जा कारीअई कारीअईअ कारीअउ कारिहिड् कारन्तोन्ती-न्तं कारिस्सइ कारिज्ज कारिज्जइ कारिज्जईअ कारिज्जउ पड् पडावीअ पडावीअइ पडावीअईअ पडावीअउ भविष्यकाल क्रियातिपत्त्यर्थ १८५ } कारेज्ज-ज्जा पडाविहिइ ) पडाविन्तो-न्ती-न्तं पडाविस्सइ) पडाविज्ज-ज्जा पडाविज्ज पडाविज्जइ पडाविज्जईअ पडाविज्जर पडाविहिइ, पडावन्तो-न्ती-न्तं पाडीअ पाडीअइ पाडीअईअ पाडीअउ पाडिज्ज पाडिज्जइ पाडिज्जईअ पाडिज्जउ होआवीअ होआवीअइ होआवीअसी- होआविअउ पडाविस्सइ) पडाविज्ज-ज्जा पाडिहिइ पाडन्तोन्ती-न्तं पाडिस्सइ. पाडेज्ज-ज्जा होआविहिई, होआविन्तोन्ती-तं होआविस्सइ होआविज्ज-ज्जा ही-हीअ होआविज्ज होआविज्जइ होआविज्जसी - होआविज्जउ होआविहिई, होआविन्तो-ती-तं होआविस्सइ होआविज्ज-ज्जा ही-हीअ
SR No.023125
Book TitleAao Prakrit Sikhe Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVijaykastursuri, Vijayratnasensuri
PublisherDivya Sandesh Prakashan
Publication Year2013
Total Pages326
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
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