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________________ (८९) भावार्थ--कुदेश, कुवृत्ति, कुभारजा, कुनदी, कुद्रव्य अने कुभोजन-ए छएनो सुज्ञ जनोए त्याग करवो. ६ कलासीमा काव्यं सकलगुणसीमा वितरणं भये सीमा मृत्युः सकलसुखसीमा सुवदना । तपःसीमा मुक्तिः सकलकृतसीमा श्रुतभृतिः प्रिये सीमाह्लादःश्रवणसुखसीमा जिनकथा॥७॥ भावार्थ--कलाओनी सीमा काव्य, बधा गुणोनी सीमा दान, भयनी सीमा मरण, समस्त सुखनी सीमा सुलक्षणी स्त्री, तपनी सीमा मुक्ति,बधा कार्योनी सीमा ज्ञानाभ्यास, प्रियजननी सीमा आनंद अने श्रवणसुखनी सीमा जिनकथा छे. ७ कूमध्यान्नृपतिर्विनश्यति यतिः संगात्सुतो लालनाद्विषो नाध्ययनात्कुलं कुतनयाच्छीलं खलोपासनात् । ह्रीमद्यादनवेक्षणादपि कृषिः स्नेहः प्रवासाश्रयान् मैत्री चाप्रणयात्समृद्धिरनयात्त्यागात्प्रमादानम् ॥ ८॥
SR No.022632
Book TitleNiti Tattvadarsh Yane Vividh Shloak Sangraha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRavichandra Maharaj
PublisherRavji Khetsi
Publication Year1917
Total Pages500
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size21 MB
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