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________________ २०८] [ जीवन-श्रेयस्कर-पाठमाला अरइरइसहे पहीणसंथवे, विरए आयहिए पहाणवं । परमपए हिं चिट्ठई, छिन्नसोए अममे अकिंचणे ॥२३॥ विवित्तलयणाइ भएज ताई, निरोवलेवाइ असंथडाइं । इसीहि चिरणाइ महायसेहि, कारण फासेज परीसहाई ॥२२॥ सन्नाणनाणोवगए महेसी, असुस्तरं चरिसं बम्मसंचयं । अणुसरे नाणधरे जसंसी, . प्रोभासई सूरिए वऽन्तलिक्खे ।।२३।। दुविहं खबेउण य पुराणपावं, निरंगणे सव्वो विप्पमुक्के । तरित्ता समुदं व महाभवोहं, __ समुद्दपाले अपुणागमं गए ॥२४॥ त्ति बेमि ॥ समुद्दपालियं समत्तं ॥ ॥ अह रहनेमिज्जं बावीसइमं अज्झयणं ॥ सोरियपुरम्मि नयरे, आसि राया महिड्ढिए । वसुदेवु त्ति नामेणं, रायलक्खणसंजुए ॥१॥ तस्स भजा दुवे श्रासी, रोहिणी देवई तहा । तासिं दोरहं दुवे पुत्ता, इट्टा रामकेसवा ॥२॥ सोरियपुरम्मि नयरे, आसि राया महिड्ढिए । समुदविजय नामं, रायलक्खणसंजुए ।।३।।
SR No.022602
Book TitleJivan Shreyaskar Pathmala
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKesharben Amrutlal Zaveri
PublisherKesharben Amrutlal Zaveri
Publication Year
Total Pages368
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size19 MB
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