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________________ कर्ता हमने नहीं देखा। यदि तर्क दिया जाए कि विश्वजगत् ऐसा कार्य है जिसे देखकर हमें यह अहसास होता है कि यह किसी के द्वारा अवश्य बनाया हुआ होना चाहिए तो हम पूछेगे कि-इस अहसास से आप ईश्वर का अनुमान करते हैं या कि ईश्वर के बनाये हए होने के तथ्य से इसके कार्य होने का अनुमान करते हैं। इस प्रकार यह अन्योन्याश्रय दोष हो जायेगा। इसके अलावा यदि मान भी लें कि विश्व (जगत्) किसी एक कर्ता का बनाया हुया है तो उस कर्ता का कोई शरीर भी होना चाहिए, क्योंकि बिना शरीर के कोई चेतन कर्त्ता नहीं है। यदि कहा जाए कि कर्तृत्व सामान्य का ही अनुमान करते हैं कि कर्ता चेतन है तो आपत्ति होगी कि ऐसा असम्भव है क्योंकि कर्तृत्व भी किसी शरीर में ही रहता है। प्रश्न है कर्ता क्यों किसी शरीर में ही रहता है ? यदि अन्य कार्यों का उदाहरण लें, जैसे खेत में उगे अंकुर, तो हम पायेंगे कि उन्हें रचने वाला कोई चेतन कर्ता नहीं है। यदि आप कहेंगे कि ईश्वर उनका कर्ता है तो वह चक्रक दोष हो जायेगा, क्योंकि इसी तर्क से इसी विषय से आप सिद्ध करना चाहते थे । तर्क के लिए हम मान लेते हैं कि ईश्वर है। अब क्या उसकी उपस्थिति मात्र से विश्व जगत् की सृष्टि हो विश्वकर्तृत्व-मीमांसा-२६
SR No.022444
Book TitleVishva Kartutva Mimansa Evam Jagat Kartutva Mimansa
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSushilsuri, Jinottamvijay
PublisherSushil Sahitya Prakashan Samiti
Publication Year1996
Total Pages116
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
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