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मूलाचार
अब समाचारके भेद कहते हैं:
दुविहो सामाचारो ओघोविय पदविभागिओ चेव । दसहा ओघो भणिओ अणेगहा पदविभागी य १२४ द्विविध समाचार औधिकः पदविभागिकश्चैव ।
Fear fast भणित अनेकधा पदविभागी च ॥ १२४ ॥
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अर्थ – समाचार अर्थात् सम्यक् आचरण दोही प्रकार हैऔधिक, पदविभागिक । औधिकके दश भेद हैं और पदविभागिक समाचार अनेक तरहका है ॥ १२४ ॥
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औधिक समाचारके दश भेद कहते हैं; इच्छामिच्छाकारो तधाकारो य आसिआ णिसिही । आपुच्छा पडिपुच्छा छंदण सणिमंतणा य उपसंपा १२५ इच्छामिथ्याकारौ तथाकारः च आसिका निषेधिका । आपृच्छा प्रतिपृच्छा छंदनं सनिमंत्रणा च उपसंपत् ॥ १२५ अर्थ - इच्छाकार, मिथ्याकार, तथाकार, आसिका, निषेधिका, आपृच्छा, प्रतिपृच्छा, छंदन, सनिमंत्रणा और उपसंपत्इसतरह ये औधिक समाचारके दशभेद हैं ॥ १२५ ॥
आगे इनका विषय तीन गाथाओंमें कहते हैं; - इट्ठे इच्छाकारो मिच्छाकारो तहेव अवराधे । पुडिसुणणद्मि तहन्ति य णिग्गमणे आसिया भणिया । पविसंते अणिसही आपुच्छणिया सकज्जआरंभे । साधम्मणा य गुरुणा पुव्यणिसिहमि पडिपुच्छा १२७ छंदण गहिदे दव्वे अगिव्वे णिमंतणा भणिदा । तुमहत्ति गुरुकुले आदणिसग्गो दु उवसंपा ।। १२८