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षडावश्यकाधिकार ७।
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उच्चारण है । इसमें अंधे घोड़ेका दृष्टांत है कि सब तरहकी औषधियोंके करनेसे वह सूझता हुआ ॥ ६३० ॥ पडिकमणणिजुत्ती पुण एसा कहिया मए समासेण । पचक्खाणणिजुत्ती एतो उ8 पवक्खामि ॥ ६३१ ॥ प्रतिक्रमणनियुक्तिः पुन एषा कथिता मया समासेन । प्रत्याख्याननियुक्तिः इत ऊर्ध्वं प्रवक्ष्यामि ॥ ६३१ ॥
अर्थ-यह प्रतिक्रमण नियुक्ति मैंने संक्षेपसे कही है अब इसके वाद प्रत्याख्यान नियुक्तिको कहता हूं ॥ ६३१॥ णामट्ठवणा व्वे खेत्ते काले य होदि भावे य । एसो पञ्चक्खाणे णिक्खेवो छव्विहो ओ ॥ ६३२॥
नाम स्थापना द्रव्यं क्षेत्र कालश्च भवति भावश्च । एषः प्रत्याख्याने निक्षेपः षइविधो ज्ञेयः ॥ ६३२ ॥ ।
अर्थ-नाम स्थापना द्रव्य क्षेत्र काल भाव-इसतरह छह प्रकारका प्रत्याख्यानमें निक्षेप जानना चाहिये ॥ ६३२ ॥ पचक्खाओ पच्चक्खाणं पचक्खियव्वमेवं तु । तीदे पच्चुप्पण्णे अणागदे चेव कालमि ॥ ६३३ ॥
प्रत्याख्यापकः प्रत्याख्यानं प्रत्याख्यातव्यमेवं तु । अतीते प्रत्युत्पन्ने अनागते चैव काले ॥ ६३३ ॥
अर्थ-प्रत्याख्यायक प्रत्याख्यान प्रत्याख्यातव्य-यह तीनप्रकारका प्रत्याख्यानका खरूप अतीतकालमें वर्तमानकालमें भविष्यत् कालमें जानने योग्य है ॥ ६३३ ॥ आणाए जाणणाविय उवजुत्तो मूलमज्झणिद्देसे। सागारमणागारं अणुपालेंतो ढधिदीओ ॥ ६३४ ॥