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________________ वालम [१७५] से 'चखना' 'चाखवू पद आ सकते हैं । वागव्यापार की दृष्टि से 'चष' की अपेक्षा 'जक्ष' से 'चखना' और 'चाखवू' को लाना ठीक प्रतीत होता है। भजन २० वां १०५ वालम-अधिक प्रिय-बल्लभतम-प्रियतम । . सं० वल्लभतम-प्रा० वल्लतम-वालहअम-बालम । 'प्रियतम' उपर से 'प्रीतम आता है इसी प्रकार 'वल्लभतम' से 'बालम' रूप आने में कोई असंगति नहि । 'प्रीतम' और 'वालम में अर्थ की एकता है । सद्गत रा० रा० नरसिंहराब भाई 'बालम' को बनाने के लिए अन्य प्रकार बताते हैं:" वल्लभ:-बल्लहु-हल्लउव्हालउ-हालव-हालम-बालम । " (गुजराती भाषा अने साहित्य पू० २३१ )। भजन २२ वर्मा १०६. महिल-बडा मकान । 'महालय' और 'महिल' शब्द में अर्थसाम्य तो है परन्तु शब्दसाम्य भी है। १०७. गोखें-जरोखे में। सं० गवाक्ष प्रा० गववख-उक्ख-गांख । 'गोखलो' (गुज०) शब्द भी 'गोख' को त्वार्थिक ला लगाने से आता है।
SR No.010847
Book TitleBhajansangraha Dharmamrut
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBechardas Doshi
PublisherGoleccha Prakashan Mandir
Publication Year
Total Pages259
LanguageHindi Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size5 MB
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