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________________ [180] रात्रि में कुमुदों का विकास : गन्धमुद्धतरजः ------------विक्षिपन्विकसतां कुमुदानाम्------------आदुधाव परिलीनविहङ्गा यामिनीमरुत्--------वनराजी: (9-31) यश का शुभ्रवर्ण : गुरून्कुर्वन्ति ते वश्यानन्वर्था तैर्वसुन्धरा येषां यशांसि शुभ्राणि ह्येपयन्तीन्दुमण्डलम् (11-64) मलय में चन्दन का वर्णन : बहुभिश्च बाहुभिरहीनभुजगवलयैर्विराजितम् । चन्दनतरुभिरिवालघुभिः प्रबलायतैर्मलयमेदिनीभृतम् ॥ (12-24) रात्रि में कमल का सङ्कोच : प्रभा हिमांशोरिव पङ्कजावलिम् निनाय सङ्कोचमुमापतेश्चमूम्॥ (14-56) प्रातः काल कमल का विकास : त्विषां ततिः पाटलिताम्बुवाहा सा सर्वतः पूर्वसरीव सन्ध्या। निनाय तेषां द्रुतमुल्लसन्ती विनिद्रताम् लोचनपङ्कजानि ॥ (16-33) यश का शुभ्र वर्ण क्यों : प्रत्याहतौजाः कृतसत्त्ववेग: पराक्रमं ज्यायसि यस्तनोति । तेजांसि भानोरिव निष्पतन्ति यशांसि वीर्यज्वलितानि तस्य।। (17-15) (प्रकाश का वर्ण शुभ्र होता है और यश के प्रकाशित स्वरूप के कारण ही सम्भवतः उसका शभ्र वर्ण माना गया है।)
SR No.010645
Book TitleAcharya Rajshekhar krut Kavyamimansa ka Aalochanatmaka Adhyayan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKiran Srivastav
PublisherIlahabad University
Publication Year1998
Total Pages339
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Literature
File Size28 MB
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