SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 168
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ पंचम भाग अंक द्वितीय-दृश्य पंचम (नारद और भामण्डल आते हैं । ) भामण्डल-कहिये नारदजी, इस समय आपका कैसे आना हुआ? नारद---भामण्डल ! मैं तुम्हें एक हर्ष समाचार सुनाने पाया है। भामण्डल---कृपा कीजिये मुनिवर । नारद---तुम्हारी बहन सीता की खोज.... ... भामण्डल-सीता की खोज मिलगई ? नारद---हां मिलगई। भामण्डल--कहाँ है ? मेरी प्यारी बहन कहां है ? जीवित है या नहीं। नारद-तुम्हारी बहन पुण्डरीक नगर में राजा बज्रजंघ के यहां सुख पूर्वक रह रही है । वहीं पर उसने दो पुत्रों का प्रसव किया है। वो दोनों पुत्र अनन्त बलके धारक कांतिवान और धर्मात्मा हैं । वो वहां से राम लक्ष्मण से युद्ध करने के लिये श्रा रहे हैं। भामण्डल---मुझे ये सुनकर अत्यन्त हर्ष हुआ । चलिये मुझे पहले पुण्डरीक नगर ले चलिये । मैं अपनी बहनसे मिलने के लिये अत्यन्त व्याकुल होरहाहूं । पुत्रोंका जन्म कौनसे दिन हुआ था।
SR No.010505
Book TitleJain Natakiya Ramayan
Original Sutra AuthorN/A
Author
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages312
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy