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________________ ( २२ ) (४०) दया पाले तो दर्श ब्रतका फल बताते हो, सो किस ? (४१) सम्यक देते हो तब (२५) व्रत कराते हो,सो किस ? (४२)बड़ी सम्यक देते हो तब(१८०)व्रत कराते हो,सो कि.? (४३) ब्रत बेला इत्यादि के पारणे पोरसी करे तो दूना फल कहते हो,सो किस शास्त्रानुसार ? (४४) वेले से लेकर आगे पांच गुने व्रत फलकी संख्या कहते हो, सो किस शास्त्रानुसार?* (४५) चार चार महीने आलोयणा करते हो, सो किस ? (४६) पोसह करे तो ११ ग्यारवां बड़ा ब्रत कहके उच्चराते हो, सो किस शास्त्रानुसार ? . .(४७) ११ ग्यारवां छोटा ब्रत कहके पोसह पारना कहते हो, सो किस शास्त्रानुसार ? (४८) सामायिक करे तो नवमा ब्रत कहके उच्चारना कहते हो, सो किस शास्त्रानुसार ? (१९) सामायिक करने वक्त एक दो मुहूर्त तथा दो चार 'घड़ीयां ऐसे कहना, किस शास्त्रानुसार? . (५०) सामायिक पारने वक्त नवमा सामायिक व्रत कहके पारना, सो किस शास्त्रानुसार? ..... . (५१) व्रत करके पानी पीना होवे तो पोसह न करे, संवर करे, कहते हो, सो किस शास्त्रानुसार ? ' * इस प्रश्न का मतलब यह है कि लगातार दो व्रत करेतो पांचव्रतका फसहोवे, तीन करे तो पच्चीस, चार करे तो सवासी, पांच करे तो सपाईसो, छ ब्रत करे तो मवा इकतीस सौ ३१२५ ब्रतका फन्त होवे इत्यादि । गुजरात मारवाड़ के कितनेक टिद्वंयों में यह रिवाल है।
SR No.010466
Book TitleSamyaktva Shalyoddhara
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAtmaramji Maharaj
PublisherAtmanand Jain Sabha
Publication Year1903
Total Pages271
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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