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________________ क्रोधके चारों स्थानोंके कालकी अपेक्षा और शेष कषायोंके स्थानोंका भावकी अपेक्षा निदर्शन- निरूपण व्यंजन अधिकार क्रोध, मान, माया और लोभके पर्यायवाची नामोंका निरूपण सम्यक्त्व - अर्थाधिकार दर्शनमोहके उपशमन करनेवाले जीवके परिणाम, योग, कषाय, उपयोग लेश्यादि सम्बन्धी प्रश्नोंका ग्रन्थकारद्वारा उद्भावन और चूर्णिकार द्वारा ६०८ ६११-६१३ उनका समाधान दर्शन मोह - उपशामक के बन्ध और उदयसम्बन्धी प्रकृतियोंका निरूपण अधःप्रवृत्त आदि तीनों करणों के स्वरूपका ६११ ६१४-६३८ निरूपण चरमसमयवर्ती मिथ्यादृटिके तदनन्तर समय में प्रथमोपशम सम्यक्त्वकी उत्पत्ति का वर्णन दर्शनमोह - उपशामक - सम्बन्धी पचीस पदवाले अल्पबहुत्वका वर्णन दर्शनमोहका उपशमन करने योग्य गति आदिका वर्णन दर्शनमोहक्षपणा-प्रस्थापकका विषय सूची स्वरूप और तत्संबंधी कुछ अन्य विशेषका वर्णन दर्शन मोह क्षपकके अपूर्वकरण में होनेवाली क्रियाओं का वर्णन दर्शन मोहक्षपकके अनिवृत्तिकरण में होने वाले स्थितिघात आदिका वर्णन सम्यक्त्वप्रकृतिकी स्थिति सत्त्व के विषय में प्रवाह्यमान और अप्रवाह्यमान उपदेशों का उल्लेख ६१४ ६१७ ६२२ ६२८ ६२६ दर्शनमोह - उपशामककी निर्व्याघातताका निरूपण उपशामक-सम्बन्धी कुछ विशेषताओंका ६३२ निरूपण दर्शनमोहक्षपणा - अर्थाधिकार ६३६-६५७ ६३० ६३१ ६४४ ६४७ प्रवाह्यमान उपदेशकी अपेक्षा अपूर्वकरण और निवृत्तिकरण में होने वाले क्रियाविशेषों का वर्णन कृतकृत्यवेदक- श्रवस्थाका और उसमें मरण आदिका वर्णन दर्शन मोहक्षपक के अपूर्वकरण के प्रथम समयसे लेकर प्रथम समयवर्ती कृतकृत्य वेदक होने तक मध्यवर्ती काल में होने वाले स्थितिकाण्डकघात आदि पदका अल्पबहुत्व संयमलब्धि श्रर्थाधिकार ६३६ संयमको प्राप्त करनेवाले जीवके संभव क्रियाओं का वर्णन संयमको प्राप्त करनेवाले जीवके पूर्वकरणके प्रथम समय से लेकर अधःवृत्तसंयत होने तकके मध्यवर्ती कालमें सभव पोंका अल्पबहुत्व सयमलब्धिस्थानोंके भेदों का वर्णन संग्रमलब्धिस्थानोंका अल्पबहुत्व ६४६ ७५ ६५० ६५३ ६५५ ६५८ संयम संयम लब्धि अधिकार ६५८-६६८ संयमासयमको प्राप्त करनेवाले जीवके परिणामोंकी उत्तरोत्तर वृद्धि और पूर्वबद्ध कर्मों की स्थिति आदिका वर्णन प्रथम समयवर्ती संयतासंयतके स्थितिकाण्डक, गुणश्रेणी आदिका वर्णन ६६२ अधःप्रवृत्तसंयतासंयत की विशेष क्रियाका वर्णन सयमासंयमको प्राप्त करनेवाले जीव के पूर्वकरण के प्रथम समय से लेकर सयमा संयमको प्राप्त कर एकातानुवृद्धिसे बढ़ने के काल तक संभव पदोंका अल्पबहुत्व संयमासयम लब्धिस्थानोंका वर्णन सयमा सयम लब्धिस्थानोंकी तीव्रमन्दताका अल्पबहुत्व , ६६४ ६६६ " ६६६-६७५ ६६६ ६७० ६७२ ६७३
SR No.010396
Book TitleKasaya Pahuda Sutta
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHiralal Jain
PublisherVeer Shasan Sangh Calcutta
Publication Year1955
Total Pages1043
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size71 MB
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