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________________ ७४ श्रोधको अपेक्षा उत्कृष्ट अनुभागउदीरणाका अल्पबहुत्व ओघको अपेक्षा जघन्य अनुभाग उदीरणाका अल्पबहुत्व नरकगतिकी अपेक्षा जघन्य अनुभाग कसायपाहुडसुत्त उदीरणाका अल्पबहुत्व प्रदेशउदीरणाके उत्तर भेदों का निरूपण उत्कृष्ट प्रदेशउदीरणाका स्वामित्व 99 जघन्य प्रदेशउदीरणाका एक जीवकी अपेक्षा प्रदेशउदीरणाका काल एक जीवकी अपेक्षा प्रदेशउदीरणाका अन्तर प्रदेशउदीरणाका सन्निकर्ष की अपेक्षा प्रदेशउदीरणांका अल्पबहुत्व नरकगति की अपेक्षा प्रदेशउदीरणाका अल्पबहुत्व प्रकृति की अपेक्षा अल्पबहुत्व स्थितिकी अपेक्षा बन्धादि पांच पदका अल्पबहुत्व अनुभाग की अपेक्षा वन्धादि पाँच पदो का अल्पबहुत्व प्रदेशों की अपेक्षा बन्धादि पाँच पदोका अल्पबहुत्व उपयोग-अर्थाधिकार ग्रन्थकार-द्वारा कपायोंके उपयोग सम्बन्धी पृच्छाओंका उद्भावन चूर्णिकार-द्वारा उक्त पृच्छाओंके उपयोग कालका अल्पवद्दुत्व की अपेक्षा कपार्यो के उपयोगकालका अल्पबहुत्व प्रवाह्यमान उपदेशकी अपेक्षा चतुर्गतिके उपयोगकालका अल्पबहुत्व चौदह जीवसमासॉकी अपेक्षा कपायों के ५१२ उपयोगकालका अल्पबहुत्व कौन जीव किस कपायमें लगातार कितनी देर तक उपयुक्त रहता है, इस शंकोका समाधान ५१५ ५१७ ५१८ ५१६ ५२२ ५२३ ५२५ ५२६ ५२७ ५२८ ५३३ ५४६ ५६५-५७६ ५३४ ५४४ ५५६ ५६० ५६१ ५६२ ५६४ ५६८ ५७० चारों गतियों की अपेक्षा कषायोंके उपयोगपरिवर्तनवारों का वर्णन कपायोंके उपयोग परिवर्तनवारोंका अल्प० ५७२ कपाय - सम्बन्धी उपयोगवर्गणाओंका और आदेशको अपेक्षा वर्णन ५७८ प्रवाहमान और प्रवाह्यमान उपदेशकी अपेक्षा कषाय और उनके अनुभागका वर्णन नौ पदोंकी अपेक्षा कषायोंके उदयस्थानों में कषायोंके उपयोगकाल - सम्वन्धी अल्पबहुत्वका वर्णन सह कषायोपयोग-वर्गणाओं में उपयुक्त जीवा वर्णन वर्तमानकालमें मानकपायसे उपयुक्त जीवोंका अतीतकाल में मान, नोमान और मिश्रकालका वर्णन मानके समान शेप कपायोंके त्रिविधकालका निरूपण चारों कपायोंके उपयुक्त वारह पढ़ोंका ५८० ५८२ ५८५ ५.८७ 13 ५६० अल्पबहुत्व कषायोदयस्थान और कषायोपयोग-कालस्थानरूप उपयोगवर्गणाओं का वर्णन ५६१ प्रवाह्यमान और अप्रवाह्यमान उपदेशों की अपेक्षा त्रस जीवोंके कषायोदयस्थानोंका वर्णन कषायोंकी प्रथमादिक तीन प्रकारकी अल्पबहुत्व श्रेणियोका निरूपण चतुःस्थान-अर्थाधिकार क्रोधादि चारों कषायों के चार-चार स्थानों का वर्णन ५६३ ५६५ ५६७-६१० ५६७ चारों कपायोंके सोलहों स्थानोंके स्थिति, अनुभाग और प्रदेशकी अपेक्षा अल्पबहुत्वका वर्णन ६०० कपायोंके स्थानोंका मार्गणास्थानों में वर्णन ६०४ कपायों के लतासमान आदि स्थानों के बन्धक अन्वक आदिका विचार कपायोंके स्थानोका निक्षेप-निरूपण ૬ ६०७
SR No.010396
Book TitleKasaya Pahuda Sutta
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHiralal Jain
PublisherVeer Shasan Sangh Calcutta
Publication Year1955
Total Pages1043
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size71 MB
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